हल्का बुखार, लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम ब्रोंकाइटिस के हो सकते हैं लक्षण, डॉक्टर से जानिए बीमारी का कारण, प्रकार और बचाव

फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नलियों में जब सूजन आ जाती है, तो सांस लेना एक चुनौती बन जाता है। इसे मेडिकल भाषा में Bronchitis कहा जाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य सर्दीजुकाम या वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर खांसी के साथ गाढ़ा बलगम और हल्का बुखार बना रहे, तो यह फेफड़ों के संक्रमण का संकेत हो सकता है। दिल्ली के एक प्रसिद्ध डॉक्टर Rajesh Kr. Bhardwaj जो कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों के एक्सपर्ट हैं ने बताया ब्रोंकाइटिस ज़्यादातर एक viral infection के कारण होता है, जिस वजह से पहले हल्का बुखार होगा और फिर वो infection आपके lungs में फैल जाता है जिसे Bronchitis कहते हैं। ब्रोंकाइटिस दो तरह का होता है एक कम समय में ही ठीक हो जाता है तो दूसरा लम्बे समय तक परेशान करता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ये बीमारी क्या है और इसके कारण कौनकौन से हैं? इसके लक्षण और इससे जुड़ी बीमारियों का खतरा कौन सा है।

हल्का बुखार, लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम ब्रोंकाइटिस के हो सकते हैं लक्षण, डॉक्टर से जानिए बीमारी का कारण, प्रकार और बचाव

ब्रोंकाइटिस क्या है?

ब्रोंकाइटिस फेफड़ों की एक स्थिति है, जिसमें सांस लेने वाली नलिकाओं में सूजन या इंफेक्शन हो जाता है। इस कारण म्यूकस यानी बलगम ज्यादा बनने लगता है, जिससे खांसी, सांस लेने में दिक्कत और छाती में भारीपन महसूस होता है। मेडिकल टर्म में इसका मतलब सूजन या इंफ्लेमेशन होता है, इसलिए ब्रोंकाइटिस का अर्थ है ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन।

ब्रोंकाइटिस के प्रकार

ब्रोंकाइटिस दो तरह का होता है एक  एक्यूट ब्रोंकाइटिस जो अचानक होने वाली और कम समय तक रहने वाली समस्या है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। आमतौर पर यह वायरल इंफेक्शन के बाद होता है। इसके लक्षण कुछ दिनों में बढ़ते हैं और फिर धीरेधीरे ठीक हो जाते हैं।

क्रोनिक ब्रोंकाइटिस में खांसी लंबे समय तक रहती है और धीरेधीरे बढ़ती है और ठीक होने में काफी समय लेती है। यह अक्सर उन लोगों में ज्यादा होती है जिनकी फेफड़ों की सेहत पहले से कमजोर होती है।

ब्रोंकाइटिस के कारण

  • वायरल इंफेक्शन ब्रोंकाइटिस का सबसे आम कारण है।
  • ये परेशानी प्रदूषण की वजह से हो सकती है।
  • मौसम में बदलाव इसका कारण होता है।
  • एलर्जी, धूल, धुआं या केमिकल्स के संपर्क में आने से भी ये खांसी होती है।

ब्रोंकाइटिस के लक्षण

  • हल्का बुखार आना
  • लगातार खांसी होना
  • खांसी के साथ बलगम निकलना
  • गले में खराश और म्यूकस जमना
  • सांस लेने में दिक्कत
  • छाती में जकड़न होना
  • सिर में तेज दर्द और कमजोरी होना शामिल है।

क्रोनिक ब्रोंकाइटिस किन लोगों में ज्यादा होता है?

  • क्रोनिक ब्रोंकाइटिस लम्बे समय तक चलने वाली बीमारी है ये उन लोगों को ज्यादा होती है जिन्हें पहले से अस्थमा है।
  • स्मोकिंग करने वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है।
  • क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज से पीड़ित लोगों को ये परेशानी होती है।
  • जिनकी लंग्स की क्षमता कमजोर है उन्हें क्रोनिक ब्रोंकाइटिस का खतरा ज्यादा रहता है।

कब हो सकता है खतरा ज्यादा?

अगर एक्यूट ब्रोंकाइटिस का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है और निमोनिया में भी बदल सकता है।

ब्रोंकाइटिस कैसे ट्यूबरक्लोसिस से अलग है?

  • कुछ मामलों में ब्रोंकाइटिस के लक्षण टीबी जैसे हो सकते हैं, लेकिन टीबी के खास संकेत अलग होते हैं
  • 34 हफ्तों से ज्यादा चलने वाली खांसी
  • शाम के समय हल्का बुखार
  • भूख कम लगना
  • वजन कम होना शामिल है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज जरूरी है, क्योंकि टीबी संक्रामक बीमारी है और दूसरों में भी फैल सकती है।

ब्रोंकाइटिस से कैसे करें बचाव ?

  • वायरल इंफेक्शन ब्रोंकाइटिस का मुख्य कारण होता है, इसलिए बारबार हाथ धोना और साफसफाई का ध्यान रखना जरूरी है।
  • धुआं, धूल और केमिकल्स फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। बचान के लिए बाहर जाते समय मास्क लगाएं, खासकर प्रदूषित जगहों पर।
  • धूम्रपान ब्रोंकाइटिस का सबसे बड़ा कारण है। खुद भी सिगरेट न पिएं और सेकेंड हैंड स्मोक से भी बचें।
  • इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। स्ट्रांग इम्यूनिटी से संक्रमण का खतरा टलता है।
  • ठंड और मौसम बदलाव से बचाव करें। ठंडी हवा या AC के सीधे संपर्क से बचें।
  • नींद पूरी लें और बॉडी को हाइड्रेट रखें। पानी का अधिक सेवन बलगम को कंट्रोल करता है और सांस लेने में होने वाली परेशानी से बचाव होता है।
  • फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाने से ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
  •  खांसीजुकाम से पीड़ित लोगों के संपर्क में आने से बचें और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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