Mojtaba Khamenei का जोश हाई, अमेरिकियों को धमकी सुनाई, Iran को आर्थिक रूप से बर्बाद करने पर तुला America

पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने अब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हाल के घटनाक्रमों में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव लगातार तेज होता दिख रहा है, जिसमें समुद्री मार्ग, सैन्य रणनीति, आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक गतिरोध सभी शामिल हैं। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिकियों के लिए कोई जगह नहीं है और उनका स्थान केवल पानी के नीचे है। यह बयान उस समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव चरम पर है। खामेनेई ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इस क्षेत्र का भविष्य अमेरिका के बिना होगा और यह क्षेत्र के लोगों की समृद्धि के लिए कार्य करेगा।
इस बीच, अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक अवरोध का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है और एक डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत काफी कम हो गई है। यह गिरावट केवल एक सप्ताह में लगभग बारह प्रतिशत बताई जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि तेल निर्यात पर लगी रोक ने अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव डाला है।

Mojtaba Khamenei का जोश हाई, अमेरिकियों को धमकी सुनाई, Iran को आर्थिक रूप से बर्बाद करने पर तुला America
वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिकी कदम को विफल बताते हुए कहा कि यह न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करेगा बल्कि तनाव को और बढ़ाएगा। उनका कहना है कि इस प्रकार की नीतियां शांति स्थापित करने की बजाय अव्यवस्था को बढ़ावा देती हैं।
दूसरी ओर, अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार एक प्रमुख अमेरिकी विमानवाहक पोत जल्द ही पश्चिम एशिया क्षेत्र से वापस लौट सकता है। यह पोत पिछले दस महीनों से अधिक समय से तैनात था और इसके लौटने से अमेरिकी नौसैनिक शक्ति में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि अन्य दो पोत अभी भी अरब सागर में सक्रिय हैं और ईरानी जहाजों पर नजर बनाए हुए हैं।
उधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा प्रबंधन की नीति से हटकर अब व्यवधान पैदा करने की रणनीति अपनाई है। उसका कहना है कि यह नीति चीन, रूस और यूरोप को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई है, लेकिन अब यह प्रयास विफल होता नजर आ रहा है और ईरान इसके खिलाफ एक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इस बीच, अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए ईरान की क्रिप्टो संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार लगभग पांच सौ मिलियन डॉलर के बराबर डिजिटल संपत्ति जब्त की गई है। इसके साथ ही विभिन्न देशों और कंपनियों पर दबाव डाला जा रहा है कि वह ईरान के साथ व्यापारिक संबंध समाप्त करें, विशेषकर तेल खरीद के मामले में। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह के कदम वैश्विक तेल कीमतों को और बढ़ा सकते हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष ने अमेरिकी सलाह को बेकार बताते हुए इसकी आलोचना की है।
उधर, विश्लेषणों के अनुसार ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहां की नेतृत्व व्यवस्था इस मुद्दे पर सख्त रुख अपना रही है और अमेरिका द्वारा लगाए गए अवरोध को हटाए बिना किसी प्रकार की वार्ता के लिए तैयार नहीं है। कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि ईरान ओमान के साथ मिलकर जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।
इसके साथ ही क्षेत्र में अन्य रणनीतिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। यमन में हूती समूहों के जरिए दबाव बनाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है, जिससे बाब अल मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष का असर साफ दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर एक सौ बीस डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे यूरोप में मुद्रास्फीति तीन प्रतिशत तक बढ़ गई है। ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल ने वहां की अर्थव्यवस्था को धीमा कर दिया है और विकास दर लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अमेरिका ने इस बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से अपील की है कि वह एक गठबंधन बनाकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करें। अमेरिका का मानना है कि सामूहिक प्रयास से ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे अभियान का बचाव करते हुए कहा है कि नौसैनिक अवरोध पूरी तरह प्रभावी है और जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त नहीं करता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की संभावना भी जताई है, जिससे नाटो सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ सकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो इस संघर्ष का प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या स्थिति और अधिक जटिल होती जाती है।

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