भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्र सरकार ने अब बीमा कंपनियों में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है। यानी अब विदेशी कंपनियां भारतीय बीमा कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी ले सकेंगी। इस फैसले से देश के इंश्योरेंस बाजार में नई कॉम्पिटिशन बढ़ने की उम्मीद है और ग्राहकों को बेहतर सर्विसेज मिल सकती हैं। हालांकि, इस बड़े फैसले के बीच सरकार ने LIC के लिए अलग नियम लागू किया है, जहां विदेशी निवेश की सीमा 20% ही रखी गई है। ऐसे में यह फैसला जहां एक ओर बाजार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है, वहीं दूसरी ओर कुछ सवाल भी खड़े करता है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, अब भारतीय बीमा कंपनियों में 100% तक विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट के जरिए किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशकों को अलग से सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उन्हें इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से अनुमति और सत्यापन जरूर लेना होगा।
LIC के लिए अलग नियम क्यों?
जहां निजी बीमा कंपनियों के लिए 100% FDI का रास्ता खोल दिया गया है, वहीं LIC में विदेशी निवेश की सीमा 20% ही रखी गई है। सरकार का यह कदम LIC की विशेष स्थिति और उसकी सार्वजनिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए लिया गया माना जा रहा है।
किन शर्तों के साथ मिलेगा 100% FDI?
सरकार ने कुछ शर्तें भी तय की हैं। जैसे
- कंपनी में चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर या CEO जैसे प्रमुख पदों पर कम से कम एक भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
- विदेशी निवेश से जुड़े सभी लेनदेन RBI के नियमों के अनुसार होंगे।
- विदेशी हिस्सेदारी वाली कंपनियों को भारतीय कानूनों के तहत रजिस्टर होना होगा।
इंश्योरेंस सेक्टर पर क्या होगा असर?
इस फैसले से देश में विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है, जिससे बीमा सेक्टर में पूंजी आएगी और नई तकनीक व बेहतर प्रोडक्ट्स का विकास होगा। साथ ही, कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ेगी, जिससे ग्राहकों को सस्ती और बेहतर पॉलिसी मिल सकती है।
कानून में बदलाव के बाद लागू हुआ फैसला
यह फैसला सबका बीमा, सबकी रक्षा संशोधन कानून 2025 के तहत लिया गया है, जिसमें पहले 74% FDI की सीमा को बढ़ाकर 100% कर दिया गया था। संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है।





