Ovarian Cancer: साइलेंट किलर है ओवरी कैंसर, महिलाओं में बढ़ते खतरे को कम करने के लिए डॉक्टर ने बताए 5 जरूरी बचाव के तरीके​

ओवरी कैंसर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं इन्हें पहचान नहीं पातीं। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक यह अक्सर एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और जीवनशैली में कुछ बदलाव इस जानलेवा खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

Ovarian Cancer: साइलेंट किलर है ओवरी कैंसर, महिलाओं में बढ़ते खतरे को कम करने के लिए डॉक्टर ने बताए 5 जरूरी बचाव के तरीके​

फोर्टिस अस्पताल की निदेशक डॉ. नीति रायजादा के मुताबिक, ओवरी कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल होता जा रहा है। यह कैंसर महिलाओं की ओवरी यानी अंडाशय में विकसित होता है, जो प्रजनन प्रणाली का बेहद अहम हिस्सा है। एक्सपर्ट ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के बाद ओवरी कैंसर महिलाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में से एक बन चुका है। इस बीमारी में ओवरी में छोटीछोटी सिस्ट बनने लगती हैं, जिससे महिलाओं की फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है और कई मामलों में प्रेग्नेंसी में दिक्कत आने लगती है।

डॉ. रायजादा बताती हैं कि ओवरी कैंसर का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य होते हैं, जिसकी वजह से ज्यादातर महिलाओं में इसकी पहचान तीसरी या चौथी स्टेज में होती है। इस दौरान कैंसर काफी फैल चुका होता है और इलाज चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर महिलाएं समय रहते इसके संकेतों को समझ लें और नियमित जांच करवाएं, तो इस बीमारी का शुरुआती स्टेज में पता लगाकर इलाज संभव है। एक्सपर्ट ने इस बीमारी से बचाव के लिए महिलाओं को कुछ लक्षण बताएं है और कुछ खास टिप्स दिए हैं जिन्हें अपनाकर इस साइलेंट किलर डिजीज से बचा जा सकता है।

ओवरी कैंसर के लक्षण

  • पेट में सूजन
  • खाना खाने में कठिनाई या जल्दी पेट भर जाने का अहसास
  • बारबार या तुरंत पेशाब आने की आवश्यकता
  • पीठ, पेट या पेल्विक में दर्द
  • कब्ज या दस्त
  • पीरियड इर्रेगुलर होना
  • थकान महसूस होना
  • अपच या पेट खराब रहना
  • सेक्स के दौरान दर्द और ब्लीडिंग होना
  • बिना कारण वजन घटना या बढ़ना

वजन को कंट्रोल में रखना है जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ता वजन सिर्फ हार्ट और डायबिटीज ही नहीं, बल्कि कई तरह के कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। मोटापे की वजह से शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, जो ओवरी में असामान्य कोशिकाओं की ग्रोथ को बढ़ावा दे सकते हैं। International Agency for Research on Cancer की एक रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में अतिरिक्त चर्बी सूजन और इंसुलिन के स्तर को बढ़ाती है। रिसर्च बताती है कि मोटापा शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को बदल देता है, जो ओवरी की कोशिकाओं में कैंसर पैदा करने वाले म्यूटेशन का कारण बन सकता है। हेल्दी वेट बनाए रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें और डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर फूड्स शामिल करें। ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम खाना बेहतर माना जाता है।

बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से पहले लें डॉक्टर की सलाह

कुछ रिसर्च में यह सामने आया है कि लंबे समय तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने से ओवरी कैंसर का खतरा कम हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये पिल्स ओव्यूलेशन को कम करती हैं, जिससे ओवरी पर पड़ने वाला दबाव घट सकता है। The Lancet में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, जो महिलाएं कम से कम 5 साल तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेती हैं, उनमें ओवरी कैंसर का खतरा 50% तक कम हो जाता है। यह सुरक्षा पिल्स छोड़ने के कई सालों बाद तक बनी रहती है, क्योंकि ये ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को ‘ब्रेक’ देती हैं। हालांकि हर महिला की बॉडी अलग होती है, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की बर्थ कंट्रोल पिल्स लेना सही नहीं माना जाता।

हॉर्मोन थेरेपी को लेकर बरतें सावधानी

मेनोपॉज के दौरान कई महिलाएं हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का सहारा लेती हैं, लेकिन लंबे समय तक इसका इस्तेमाल कुछ मामलों में ओवरी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा 50 से अधिक अध्ययनों के विश्लेषण में पाया गया कि मेनोपॉज के बाद 5 साल तक HRT लेने वाली महिलाओं में ओवरी कैंसर का खतरा 40% तक बढ़ गया।शोधकर्ताओं का सुझाव है कि HRT का इस्तेमाल केवल गंभीर लक्षणों में और कम से कम समय के लिए डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि HRT शुरू करने से पहले इसके फायदे और नुकसान दोनों को समझना जरूरी है। किसी भी तरह की हॉर्मोनल दवा हमेशा मेडिकल सलाह के बाद ही लें।

फैमिली हिस्ट्री को नजरअंदाज न करें

अगर परिवार में किसी महिला को पहले ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर हो चुका है, तो सतर्क रहना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जेनेटिक कारण इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। National Cancer Institute के अनुसार, लगभग 15% ओवरी कैंसर के मामले जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होते हैं। यदि परिवार में ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर की हिस्ट्री है, तो नियमित हेल्थ चेकअप, जरूरी स्क्रीनिंग और डॉक्टर से समयसमय पर सलाह लें।

धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना बेहतर

धूम्रपान सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं की प्रजनन सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ प्रकार के ओवरी कैंसर का संबंध स्मोकिंग से भी देखा गया है। वहीं अत्यधिक शराब पीने से हार्मोनल असंतुलन और शरीर की इम्यूनिटी प्रभावित हो सकती है। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार माना जाता है।

नियमित जांच और शरीर के संकेतों पर ध्यान दें

ओवरी कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे पेट फूलना, पेट दर्द, भूख कम लगना या थकान जैसे हो सकते हैं। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ना संभव हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या या लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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