‘पेंशन कोई बख्शीश नहीं है’, यूपी सरकार की मनाही और हाई कोर्ट के ढुलमुल रवैया के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर से पीड़ित एक वरिष्ठ नागरिक को राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट को जरूरी निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा कि वह उसकी पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से संबंधित याचिका पर जल्द सुनवाई करे, जो पिछले नौ वर्षों से लंबित है।

‘पेंशन कोई बख्शीश नहीं है’, यूपी सरकार की मनाही और हाई कोर्ट के ढुलमुल रवैया के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाई कोर्ट से कहा कि 77 वर्षीय व्यक्ति के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और उनके मामले पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए।

शीर्ष अदालत राम शंकर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके मामले में निर्णय में अत्यधिक देरी से संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

उत्तर प्रदेश में सरकारी पद पर रहे शंकर ने अपनी याचिका में कहा कि “पेंशन कोई बख्शीश नहीं है”, बल्कि यह कर्मचारी का अर्जित अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

याचिकाकर्ता ने एक जून 1970 से 28 मई 1985 तक सेवा दी। इसके बाद उन्होंने गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में सेवा शुरू की। राज्य सरकार ने कुछ नियमों और प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्हें पेंशन संबंधी लाभ देने से इनकार कर दिया। शंकर ने 2017 में उच्च न्यायालय का रुख किया जहां मामला लंबित रहा और राज्य सरकार द्वारा समय मांगने के कारण कई बार स्थगित होता रहा।

राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया है। हरभजन सिंह की याचिका पर हाई कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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