बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, RBI गवर्नर ने दिए संकेत​

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. फिलहाल सरकार और सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक जारी रखना आसान नहीं होगा.

बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, RBI गवर्नर ने दिए संकेत​

स्विट्जरलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में माल्होत्रा ने कहा कि सरकार ने अभी एक्साइज ड्यूटी कम कर रखी है और सरकारी तेल कंपनियां भी नुकसान सहते हुए ग्राहकों पर पूरा बोझ नहीं डाल रही हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। लेकिन अगर युद्ध और तनाव लंबा खिंचता है, तो कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों तक पहुंच सकती है.

पीएम मोदी ने की बचत की अपील

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से ईंधन की बचत करने और गैरजरूरी खर्च कम करने की अपील की है. उन्होंने खास तौर पर पेट्रोलडीजल का कम इस्तेमाल करने और सोने की खरीद टालने की सलाह दी है, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखा जा सके. सरकार ने सोने पर आयात शुल्क भी दोगुना से ज्यादा बढ़ा दिया है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आयातित सामानों की मांग कम करने के लिए और भी कदम उठाए जा सकते हैं.

महंगाई पर बढ़ रहा दबाव

भारत में खुदरा महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48 फीसदी हो गई, जबकि मार्च में यह 3.40 फीसदी थी. हालांकि यह आंकड़ा अनुमान से कम रहा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है.

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है. माल ढुलाई और तेल आपूर्ति में दिक्कतें बढ़ने लगी हैं, जिसका असर आने वाले महीनों में भारतीय बाजार पर दिख सकता है.

RBI रखेगा हालात पर नजर

RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है और महंगाई औसतन 4.6 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है. हालांकि कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि युद्ध लंबा चला तो आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है. RBI ने अप्रैल में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा था. गवर्नर माल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक अब हर बैठक में आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर फैसला ले रहा है. उन्होंने साफ किया कि अगर महंगाई का असर लंबे समय तक बना रहता है, तो RBI जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.

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