नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और NBFCs के लिए कर्ज वसूली से जुड़े नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसके तहत अब बैंक डूब चुके कर्ज की वसूली के लिए गिरवी रखी गई जमीन या मकान जैसी अचल संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकेंगे। हालांकि, इन संपत्तियों को बैंक हमेशा के लिए नहीं रख पाएंगे। उन्हें सात साल के भीतर इन्हें बेचना होगा। यह नियम उन खास हालातों के लिए हैं जब कर्ज वसूली की प्रक्रिया के तहत ऐसी संपत्तियों को अपने हाथ में लेना पड़ता है। आरबीआई ने इस पर 26 मई तक सुझाव मांगे हैं।

आम तौर पर, इन संस्थानों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने कर्ज देने के कारोबार के बदले किसी प्रॉपर्टी जैसी संपत्ति पर कब्जा करें। हालांकि, कुछ खास मामलों में जब कर्ज डूब जाता है तब ये संस्थान वसूली की रणनीति के तौर पर उस अचल संपत्ति का मालिकाना हक ले सकते हैं, जिसे सिक्योरिटी के तौर पर रखा गया था।
क्या होगा फायदा?
RBI ने स्पेसिफाइड नॉनफाइनेंशियल असेट्स पर जारी इन निर्देशों के मसौदे में कहा है कि ऐसी संपत्तियों को सही समय पर और पारदर्शी तरीके से बेचने से संस्थानों को अपना ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने में मदद मिलेगी। ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि इन नियमों का फायदा सिर्फ उन्हीं कर्जों की भरपाई के लिए लिया जा सकेगा जिन्हें नॉनपरफॉर्मिंग घोषित कर दिया गया है और जहां वसूली के दूसरे सभी रास्ते बंद या बेकार साबित हो चुके हैं।
SNFA का मतलब उस अचल संपत्ति से है, जिसे कोई बैंक या संस्थान उधार लेने वाले से अपने पैसे वसूलने के लिए अपने कब्जे में लेता है। इसमें नॉनबैंकिंग असेट्स भी शामिल हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। मसौदे में आगे कहा गया है कि ये संस्थान उधार लेने वाले पर अपने पूरे या कुछ बकाया पैसों के बदले ऐसी संपत्तियां हासिल कर सकते हैं।
आरबीआई का प्रस्ताव
RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए कर्ज वसूली से जुड़े नए नियमों का ड्राफ्ट पेश किया है
NPA की वसूली के लिए गिरवी रखी गई जमीन या मकान को अपने कब्जे में ले सकेंगे
बैंक प्रॉपर्टी को हमेशा के लिए नहीं रख पाएंगे, उन्हें सात साल के भीतर इन्हें बेचना होगा
ऐसी संपत्तियों को सही समय पर बेचने से संस्थान ज्यादा से ज्यादा वसूली कर पाएंगे
कौन नहीं खरीद पाएगा प्रॉपर्टी?
इसके अलावा, ऐसी संपत्तियों को समय पर बेचने के मकसद से इन्हें अधिकतम सात साल तक अपने पास रखने का प्रस्ताव दिया गया है। गड़बड़ी की आशंका को खत्म करने के लिए ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि बैंक या संस्थान ऐसी प्रॉपर्टी को वापस उसी उधार लेने वाले या उससे जुड़े किसी व्यक्ति को नहीं बेच पाएंगे।





