Red Fort: मुगलों ने दिल्ली के लाल किले में क्या-क्या बनवाया? मस्जिद से वॉटर कैनाल तक, ये हैं खासियतें

दिल्ली का लाल किला 378 साल का हो गया. यह महत्वपूर्ण इमारत साल 1648 में बनकर पूरी हुई. इसके निर्माण में दस वर्ष लगे थे. मतलब निर्माण की शुरुआत साल 1638 में हुई थी. महीना अप्रैलमई होने का अनुमान है. लाल किला की देखरेख करने वाले संस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं निर्माण शुरू होने की तारीख का उल्लेख नहीं करते. हालांकि, कुछ वेबसाइट्स 29 अप्रैल, कुछ 12 और कुछ 13 मई, 1638 में नींव रखने की जानकारी देते हैं.

Red Fort: मुगलों ने दिल्ली के लाल किले में क्या-क्या बनवाया? मस्जिद से वॉटर कैनाल तक, ये हैं खासियतें

मुगल बादशाह शाहजहां की देखरेख में उस्ताद अहमद लाहौरी ने इसे डिजाइन किया था. लाल किला आज भारत की शान है. पहचान है. लाल किला सिर्फ एक ऐतिहासिक किला नहीं है. यह एक पूरा शाही शहर हुआ करता था. समय के साथ कुछ बदलाव जरूर हुए हैं लेकिन मूल तत्व अभी भी कायम रखने का प्रयास है. इसके अंदर रहने, पूजा करने, आराम करने और शासन चलाने की पूरी व्यवस्था थी. अधिकतर लोग इसकी ऊंची लाल दीवारों और बड़े दरबारों को ही जानते हैं. लेकिन किले में कई ऐसी जगहें हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. सुरक्षा कारणों से हर जगह पर्यटकों को जाने की अनुमति भी नहीं मिलती.आइए, एक बार लेकर चलते हैं लाल किला के अंदर. जानते हैं कि आखिर शाहजहाँ ने अंदर क्याक्या बनवाया था?

सादगी में सुंदरता है मोती मस्जिद

लाल किला के अंदर एक छोटी और बहुत सुंदर मस्जिद है, जिसे मोती मस्जिद कहा जाता है. यह सफेद संगमरमर से बनी है. इसका रंग मोती जैसा चमकदार दिखता है, इसलिए इसका नाम मोती मस्जिद पड़ा. यह मस्जिद शाही परिवार के लिए बनाई गई थी. यहां बादशाह और उनके खास लोग नमाज पढ़ते थे. यह बहुत बड़ी नहीं है. इसकी सादगी ही इसकी खासियत है. यहां का वातावरण बहुत शांत रहता है. जब सूरज की रोशनी इस पर पड़ती है, तो यह और भी सुंदर लगती है.

मोती मस्जिद.

राजसी जीवन की झलक हैं शाही महल

मोती मस्जिद के पास कई शाही महल बने हुए थे. इनमें खास महल, रंग महल और मुमताज महल शामिल हैं. ये सभी महल बहुत सुंदर तरीके से सजाए गए थे. दीवारों पर नक्काशी, रंगीन पत्थरों का काम और सुंदर डिजाइन देखने को मिलते हैं. इन महलों में शाही परिवार रहता था. यहां आराम करने के कमरे थे. महिलाओं के लिए अलग हिस्से बनाए गए थे. हर जगह पर गोपनीयता और सुविधा का ध्यान रखा गया था. यह क्षेत्र शाही जीवन की असली झलक दिखाता है.

लाल किले के अलगअलग हिस्सों में कई दिलचस्प निर्माण हुए हैं.

रानियों का खास स्थान रंग महल

रंग महल खासतौर पर शाही महिलाओं के लिए बनाया गया था. इसका नाम ही बताता है कि यह रंगों और सजावट से भरा हुआ था. यहां की दीवारों पर सुंदर चित्र और नक्काशी की गई थी. इस महल में एक खास बात थी. यहां से पानी की नहर गुजरती थी. इससे वातावरण ठंडा रहता था. गर्मियों में यह बहुत राहत देता था. यहां शाही महिलाएं समय बिताती थीं. यह एक निजी और आरामदायक स्थान था.

स्वर्ग जैसी जल व्यवस्था

लाल किला की सबसे खास चीजों में से एक है नहरएबिहिश्त. इसका मतलब है स्वर्ग की नहर. यह एक पानी की धारा थी, जो किले के अंदर कई जगहों से होकर गुजरती थी. इस नहर का काम सिर्फ सजावट नहीं था. यह महलों को ठंडा रखने में मदद करती थी. इससे कमरे ठंडे रहते थे और हवा भी ताजा रहती थी. पानी की हल्की आवाज पूरे माहौल को शांत बनाती थी. नहरएबिहिश्त मुगल वास्तुकला का शानदार उदाहरण है. यह दिखाती है कि उस समय लोग पानी का उपयोग कितनी समझदारी से करते थे. यह नहर यमुना नदी से जुड़ी हुई थी, जिससे इसमें हमेशा पानी रहता था.

हमाम यानी शाही स्नानघर

लाल किला के अंदर हामाम भी बनाए गए थे. हामाम यानी शाही स्नानघर. यहां बादशाह और उनका परिवार स्नान करते थे. यह जगह बहुत खास होती थी. हामाम में गर्म और ठंडे पानी की व्यवस्था थी. यहां फर्श और दीवारों पर सुंदर काम किया गया था. यह सिर्फ नहाने की जगह नहीं थी, बल्कि आराम करने का स्थान भी था. यहां लोग स्नान के साथसाथ विश्राम भी करते थे.

दीवानएआम.

दीवानएआम यानी जनता के लिए दरबार

लाल किला में दीवानएआम नाम का एक बड़ा हॉल है. यहां बादशाह आम लोगों से मिलते थे. लोग अपनी शिकायतें लेकर आते थे. यहां न्याय किया जाता था. यह जगह बहुत खुली और बड़ी थी. यहां एक सिंहासन बना हुआ था, जहां बादशाह बैठते थे. यह स्थान जनता और राजा के बीच संबंध का प्रतीक था.

दीवानएखास यानी खास मेहमानों का अड्डा

दीवानएखास एक अलग दरबार था. यहां केवल महत्वपूर्ण लोग आते थे. जैसे—विदेशी मेहमान, मंत्री और राजदूत. यह हॉल बहुत सुंदर था. इसमें संगमरमर का उपयोग किया गया था. दीवारों पर कीमती पत्थरों की सजावट थी. यहां की छत और खंभे भी बहुत खास थे. यह स्थान शाही वैभव को दर्शाता है.

दीवानएखास.

बाग और हरियाली यानी प्रकृति का संगम

लाल किला के अंदर कई बाग लगाए गए थे. मुगल काल में बागों को बहुत महत्व दिया जाता था. ये बाग सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं थे, बल्कि ठंडक और शांति के लिए भी थे. इन बागों में पेड़, फूल और पानी की धाराएं होती थीं. इससे वातावरण ठंडा रहता था. लोग यहां टहलते थे और आराम करते थे. यह प्रकृति और वास्तुकला का सुंदर मेल था.

रसोई और अन्य व्यवस्थाएं

लालकिला में शाही रसोई भी थी. यहां रोजाना शाही परिवार के लिए भोजन तैयार किया जाता था. इसके लिए अलगअलग कक्ष बनाए गए थे. सेवकों के रहने की जगह, भंडार घर और सुरक्षा के लिए चौकियां भी इसी का हिस्सा थीं. हर चीज का एक तय स्थान था. इससे पूरा किला एक व्यवस्थित शहर की तरह चलता था.

कम लोग क्या जानते हैं?

बहुत से लोग सोचते हैं कि लाल किला सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक है. लेकिन असल में यह एक जीवंत शाही नगर था. यहां हर जरूरत का ध्यान रखा गया था. मोती मस्जिद से लेकर नहरएबिहिश्त तक, हर चीज का एक खास उद्देश्य था. यह केवल सुंदरता के लिए नहीं था, बल्कि सुविधा और आराम के लिए भी था.

लाल किला केवल एक किला नहीं है. यह इतिहास, कला और विज्ञान का संगम है. यहां बनी हर इमारत एक कहानी सुनाती है. मोती मस्जिद सादगी की मिसाल है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। नहरएबिहिश्त बुद्धिमानी का उदाहरण है. महल शाही जीवन की झलक देते हैं. अगर हम ध्यान से देखें, तो लालकिला के अंदर एक पूरी दुनिया छिपी हुई है. यह हमें सिखाता है कि पुराने समय में भी लोग कितनी सोचसमझकर निर्माण करते थे. इसलिए जब भी आप लालकिला देखें, तो सिर्फ उसकी दीवारों को न देखें. उसके अंदर की कहानी को समझने की कोशिश करें. यही इस ऐतिहासिक धरोहर की असली खूबसूरती है.

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