Shani Jayanti 2026: शनि जयंती पर 13 साल बाद महासंयोग, इन Powerful Mantras का करें जप, शनिदेव की रहेगी शुभ दृष्टि​

Shani Jayanti 2026: शनि जयंती पर 13 साल बाद महासंयोग, इन Powerful Mantras का करें जप, शनिदेव की रहेगी शुभ दृष्टि​
आज यानी 16 मई को शनि जयंती मनाई जा रही है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर शनि देव का जन्म हुआ। शनि देव का जन्मोत्सव उनके अपने वार शनिवार की अमावस्या पर पड़ा है, जो कि करीब 13 वर्षों में पहली बार हुआ है। अगर आप शनि देव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो यह दिन सबसे शुभ है। इस दिन आप शनि के मंत्रों का जप कर सकते हैं। जिससे आप पर शनि की शुभ दृष्टि रहे। वर्तमान में सिंह, धनु राशि के जातकों पर ढैय्या चल रही है। बल्कि कुंभ, मीन और मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इस खास मौके पर आप शनि देव के इन मंत्रों का जप कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं शनिदेव किन मंत्रों का जप करना सबसे उत्तम है और इसकी विधि
शनि देव के मंत्र और अर्थ
ओम शं शनैश्चराय नमः
इस मंत्र का अर्थ है कि हे शनिदेव आपको नमस्कार, हम आपसे विनती करते हैं कि आप हमारे द्वारा अनजाने में किए गए पाप कर्मों को नाश करें और शुभ फल दें।
ओम शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
यह शनि देव का गायत्री मंत्र है। शनि के इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति पर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है।
ओम नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।
यह मंत्र शनिदेव की प्रार्थना और तांत्रिक मंत्र है। इसका अर्थ है कि नीले रंग के समान आभा वाले, सूर्य के पुत्र, यम के भाईस छाया और सूर्य के पुत्र शनिदेव हम आप नमस्कार करते हैं। हम पर कृपा करें।
ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
यह शनिदेव का बीज मंत्र है। जिस व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होती है उन्हें इस मंत्र का जप करना चाहिए।
शनि मंत्र जप करने की सही विधि
  शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  अब साफ काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और पीपल पर सरसों के तेल का दिया जलाएं।
  शनि देव को काले तिल, उड़द दाल, नीले फूल और सरसों का तेल अर्पित करें।
 आपके घर के पास शनि मंदिर है तो पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके आसन पर बैठें आप चाहे तो अपने घर के मंदिर में भी बैठ सकते हैं।
  इसके बाद रुद्राक्ष की माला लेकर शनि के मंत्रों का जप करें।

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