उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है. सहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और ओम प्रकाश राजभर की करीबी माने जाने वाले प्रेम चंद्र कश्यप ने पार्टी छोड़कर वीआईपी पार्टी जॉइन कर ली है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब लोकसभा चुनाव के बाद सभी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं.

प्रेम चंद्र कश्यप उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री की SBSP से लंबे समय तक जुड़े रहे. उनके VIP पार्टी में शामिल होने को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है.
यूपी में पैठ बढ़ाने में जुटे मुकेश सहनी
उन्होंने बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की अगुवाई वाली वीआईपी पार्टी का दामन थामा. इसी मौके पर अच्छे लाल निषाद ने भी वीआईपी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. अच्छे लाल निषाद पूर्व मंत्री रह चुके हैं और जन अधिकारी पार्टी से जुड़े हुए थे.
मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिशों में जुटी हुई है. पिछड़े और अति पिछड़े वोट बैंक, खासकर निषाद, कश्यप, मल्लाह और साहनी समुदायों को साधने की रणनीति के तहत यह काफी मायने रखती है.
मुकेश सहनी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, लखनऊ स्थित चिन्मय रिसॉर्ट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रेमचंद कश्यप एवं पूर्व राज्यमंत्री अच्छेलाल निषाद सहित कई सम्मानित साथियों ने वीआईपी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.
उन्होंने आगे लिखा, इस अवसर पर पार्टी की नीतियों एवं विचारधारा पर विस्तार से चर्चा हुई और सभी नए सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया. यह जुड़ाव पार्टी को और मजबूती प्रदान करेगा तथा समाज के हित में हमारी आवाज को और बुलंद करेगा.
ओम प्रकाश राजभर को झटका
SBSP से कश्यप का जाना ओम प्रकाश राजभर के लिए भी एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे प्रदेश स्तर पर पार्टी की कमान संभाल रहे थे. ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. वह सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, और खासकर पिछड़े वर्ग तथा राजभर समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने समयसमय पर विभिन्न दलों के साथ गठबंधन किए हैं. फिलहाल वह भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं और योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं. राज्य की सियासत में उनकी भूमिका अहम और असरदार मानी जाती है.





