खाने पीने से जुड़े कई मिथक हैं जो सालों से चले आ रहे हैं। हालांकि डॉक्टर इन पर ज्यादा भरोसा नहीं करते हैं, लेकिन दादी नानी इन्हें आज भी मानती हैं। ऐसा ही एक मिथक है कि मछली खाने के बाद दूध नहीं पीते हैं। दूध से बनी चीजें नहीं आते हैं। अगर ऐसा करते हैं तो इससे शरीर पर सफेद धब्बे हो जाते हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जिसे मेडिकल की भाषा सफेद दाग या विटिलिगो भी कहते हैं। आइये जानते हैं क्या वाकई मछली खाने के बाद दूध पीने से ऐसा होता है?

मछली के बाद दूध नहीं पीना चाहिए?
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य के लिहाज से दूध और मछली दोनों बहुत ही लाभदायक हैं। जहां दूध में कैल्शियम, विटामिन B 12 और प्रोटीन पाया जाता है वहीं मछली में ओमेगा3 फैटी एसिड, प्रोटीन और विटामिन D पाया जाता है। इन दोनों में भरपूर मात्रा में पौष्टिक खाद्य पदार्थ मौजूद होता है जो आपके शरीर का पोषण करता है।
क्या कहता है विज्ञान
कुछ लोग मानते हैं कि शरीर के अंदर मछली और दूध के मिश्रण से एक केमिकल प्रतिक्रिया शुरू होती है जो आपके लिए नुकसानदायक है और इससे त्वचा रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। विज्ञान की मानें तो ये पूरी तरह से एक मिथक है क्योंकि विटिलिगो एक ऐसी बीमारी है जो इम्मून सिस्टम के कमजोर होने की वजह से होती है और इसमें मेलानिन की अहम भूमिका है। इस पूरी प्रक्रिया में फ़ूड कॉम्बिनेशन का कोई महत्त्व नहीं है।
क्या कहता है आयुर्वेद
लेकिन आयुर्वेदिक विशेषज्ञ इस पूरे मामले को अलग तरीके से देखते हैं। आयुर्वेद में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें साथ में नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह विरुद्ध आहार की श्रेणी में आते हैं। ऐसे ही विरुद्ध आहारों की श्रेणी में दूध और मछली को भी रखा जाता है। जब आप इन दोनों को साथ में खाते हैं तो पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और आपको पेट की समस्या जैसे अपच, कब्ज, गैस आदि हो सकता है। लेकिन हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता है।
इन लोगों को रहना चाहिए सावधान
विज्ञान के अनुसार दूध और मछली को साथ में खाने से कोई गंभीर समस्या होने के साक्ष्य मौजूद नहीं है। लेकिन जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर है उन्हें इससे परेशानी हो सकती है। इसलिए आपको अपने शरीर की आवश्यकता को समझना होगा। अगर पहले से किसी प्रकार की फूड एलर्जी है तो इस संयोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। मछली को दूध के साथ खाने से कोई नुकसान होता है इस बात का कोई प्रमाण नहीं है। इसलिए आप किसी भी विशेषज्ञ से संपर्क करके अपने शरीर को समझें फिर उचित मात्रा में इस सेवन करें।





