ट्रंप के एक बयान से सहम गया बाजार, 110 डॉलर के पार निकला कच्चा तेल​

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भयंकर उबाल देखने को मिल रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव ने ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है, जिसका असर ब्रेंट क्रूड के भाव पर पड़ा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है. जब भी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इस तरह तेजी से भागती हैं, तो इसका सीधा असर पेट्रोलडीजल के दामों के जरिए आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ता है. इस ताजा तेजी के पीछे की मुख्य वजह ट्रंप की वह सख्त चेतावनी है, जिसमें उन्होंने ईरान को साफ शब्दों में कहा है कि अब फैसले लेने का वक्त खत्म हो रहा है.

ट्रंप के एक बयान से सहम गया बाजार, 110 डॉलर के पार निकला कच्चा तेल​

110.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है ब्रेंट क्रूड

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.32 प्रतिशत की जोरदार छलांग के साथ 110.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यह 5 मई के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी पीछे नहीं है. यह 1.75 प्रतिशत उछलकर 107.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो 4 मई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है. दरअसल, फरवरी के अंत में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर शुरुआती हमले किए थे, तब से लेकर अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा का बेतहाशा उछाल आ चुका है.

ट्रंप की वह चेतावनी जिसने बाजार में फैलाई दहशत

कच्चे तेल की इस आग में घी डालने का काम डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने किया है. रविवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सरेआम ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि उनके पास अब समय निकलता जा रहा है. उन्हें बहुत जल्द फैसला करना होगा, वरना उनके हाथ कुछ नहीं लगेगा. एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप एक डील चाहते हैं. उन्होंने शनिवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ और व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ के साथ युद्ध के हालात पर गहन मंथन किया. मंगलवार को उनकी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक और अहम बैठक होने वाली है. ट्रंप ईरान के नए प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो उस पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा.

खाड़ी देशों में सप्लाई का बढ़ता संकट

कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि की एक बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई चेन का बुरी तरह प्रभावित होना है. होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही कम हो गई है, जिससे फारस की खाड़ी के उत्पादकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मॉर्गन स्टेनली जैसी प्रमुख वित्तीय संस्था ने भी चेतावनी दी है कि बाजार इस वक्त “समय के खिलाफ एक दौड़” में है. अगर जून महीने तक यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता बंद रहता है, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं. इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट को खत्म करने के फैसले ने भी आपूर्ति पर भारी दबाव डाला है, जबकि भारत ने इस छूट को आगे बढ़ाने की गुजारिश की थी. इस वीकेंड संयुक्त अरब अमीरात के एक परमाणु संयंत्र पर हुए ड्रोन हमले ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ऊर्जा ठिकानों पर खतरा बरकरार है.

इजरायल की युद्ध की नई तैयारी

हालात इसलिए भी नाजुक बने हुए हैं क्योंकि 8 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद अब फिर से युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट के अहम सदस्य ज़ेव एल्किन ने कान रेडियो पर साफ कर दिया है कि अगर ट्रंप इशारा करते हैं, तो देश ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. एल्किन के मुताबिक, उनके पास पहले से तय टारगेट मौजूद हैं जिन्हें वो हिट करना चाहते हैं.

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