अस्पताल में हाथ जोड़ता रहा बेटा फिर भी इमरजेंसी में भी नहीं आए डॉक्टर; दर्द से तड़पकर हुई बुजुर्ग की मौत

जयपुर के SMS अस्पताल में भर्ती 69 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. परिजनों का कहना है कि पूरी रात सीनियर डॉक्टर का इंतजार होता रहा और सुबह होते-होते बुजुर्ग ने बेटे की गोद में दम तोड़ दिया.

अस्पताल में हाथ जोड़ता रहा बेटा फिर भी इमरजेंसी में भी नहीं आए डॉक्टर; दर्द से तड़पकर हुई बुजुर्ग की मौत

जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल में एक बुजुर्ग की मौत की घटना सिर्फ एक सामान्य मेडिकल केस नहीं है. यह एक पूरे परिवार के टूटते भरोसे, एक बेटे की बेबसी और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही की कहानी है. खैरथल-तिजारा इलाके के रहने वाले 69 वर्षीय किशनलाल जी को आधी रात अचानक पैरों में बहुत तेज दर्द उठा. दर्द इतना असहनीय था कि परिवार वाले घबरा गए. उनका बेटा तुरंत उन्हें जीवन बचाने की उम्मीद लेकर जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS ले गया. उस समय परिवार को पूरा विश्वास था कि यहां अच्छे डॉक्टर हैं, बेहतर इलाज मिलेगा और उनके पिता जल्दी ठीक हो जाएंगे. लेकिन दुर्भाग्य से यह रात उनके लिए जीवन की सबसे लंबी, सबसे तकलीफदेह और याद रखने वाली रात बन गई.

अस्पताल पहुंचने के बाद क्या हुआ?

अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की और किशनलाल जी को सीटीवीएस वार्ड में भर्ती कर लिया. जांच में पता चला कि उनके पैरों की नसें ब्लॉक हो गई हैं. यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें तुरंत सही इलाज की जरूरत होती है. परिवार वाले उम्मीद लगाए बैठे थे कि अब डॉक्टर उन्हें जल्दी राहत देंगे. लेकिन रात भर कुछ नहीं हुआ. परिजनों का कहना है कि न तो कोई सीनियर डॉक्टर वार्ड में आए और न ही कोई ठोस इलाज शुरू किया गया. सिर्फ रेजिडेंट डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौजूद थे. बेटा बार-बार हाथ जोड़कर उनसे गुहार लगाता रहा, ‘प्लीज किसी सीनियर डॉक्टर को बुला लीजिए, मेरे पिता को बहुत दर्द हो रहा है.’ हर बार एक ही जवाब मिलता, ‘सुबह सीनियर डॉक्टर आएंगे, तब देखेंगे.’ पूरा परिवार इस उम्मीद की किरण में था की डॉक्टर आकर देख लेंगे. पूरी रात किशनलाल जी दर्द से कराहते रहे. उनका बेटा उनके सिरहाने खड़ा रहा, लेकिन कुछ भी नहीं कर पा रहा था. वह सिर्फ अपने पिता की पीड़ा देखता रहा और हर पल सोचता रहा कि शायद अगले कुछ मिनट में कोई डॉक्टर आ जाए. लेकिन समय बीतता गया और सुबह होने से पहले ही सब कुछ खत्म हो गया.

बेटे के सामने पिता ने तोड़ा दम

रात भर दर्द सहने के बाद किशनलाल जी सुबह होते-होते अपने बेटे की गोद में ही आखिरी सांस ले गए. जिस बेटे ने उन्हें बचाने की उम्मीद में अस्पताल पहुंचाया था, उसी की आंखों के सामने पिता की सांसें थम गईं. यह पल सिर्फ मौत नहीं था, बल्कि एक बेटे के पूरे विश्वास का टूटना था. परिवार वाले सदमे में चले गए. पिता की मौत के बाद परिवार का दर्द गुस्से में बदल गया. उन्होंने अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई. गुस्से की इस आग में एक परिजन ने पास रखी फल काटने की छोटी छुरी उठा ली. हालात बिगड़ने लगे और अफरा-तफरी मच गई.

परिवार पर ही कार्रवाई?

परिवार का आरोप है कि जो लोग रात भर इलाज के लिए गिड़गिड़ा रहे थे, उन पर ही उल्टा पुलिस का केस दर्ज कर दिया गया. उन्हें थाने ले जाकर माफी नामा लिखवा लिया गया. वहीं जिन डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप था, उनसे कोई जवाब तक नहीं मांगा गया. इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि किशनलाल जी का शव घंटों तक वार्ड के बेड पर ही पड़ा रहा. अस्पताल के स्टाफ ने इसे मोर्चरी तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी नहीं ली. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। आखिरकार आसपास के दूसरे मरीजों और उनके परिचितों ने मानवता दिखाई और उन्होंने मिलकर शव को मोर्चरी तक पहुंचाया.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है. अगर रात के समय सीनियर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो गंभीर मरीजों की जिम्मेदारी किसके ऊपर है?. इमरजेंसी में तुरंत इलाज क्यों नहीं शुरू किया गया?. क्या समय पर सही इलाज मिल जाता तो किशनलाल जी आज जिंदा होते?. सरकारी अस्पतालों में गरीब और आम लोगों का भरोसा इसी तरह बार-बार टूटता जा रहा है. लोग उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन कई बार उन्हें सिर्फ इंतजार और निराशा मिलती है.

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