FDI मंजूरी में अब नहीं होगी देरी! मोदी सरकार ने जारी की नई SoP, 12 हफ्तों की डेडलाइन तय

सरकार अब विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आवेदनों को प्रोसेस करने के लिए अपडेटेड स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अनुसार, सभी FDI प्रस्तावों को 12 हफ्तों के अंदर मंजूरी देगी. SOP के अनुसार, प्रस्तावों पर फैसला लेने के लिए 12 हफ्तों तक का समय तय किया गया है. इसमें वह समय शामिल नहीं है जो आवेदक प्रस्तावों में कमियों को दूर करने या सक्षम अधिकारी द्वारा मांगी गई अतिरिक्त जानकारी देने में लगाते हैं. सरकार के 2017 के SOP में प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए ज्यादा से ज्यादा 10 हफ्तों का समय तय किया गया था. मौजूदा SOP के अनुसार, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड को उन प्रस्तावों पर विचार करने के लिए दो अतिरिक्त हफ्ते भी दिए जाएंगे जिन्हें अस्वीकार करने का प्रस्ताव है, या जहां सक्षम अधिकारी द्वारा अतिरिक्त शर्तें लगाने का प्रस्ताव है.

FDI मंजूरी में अब नहीं होगी देरी! मोदी सरकार ने जारी की नई SoP, 12 हफ्तों की डेडलाइन तय

SOP का मकसद

DPIIT ने कहा कि इस SOP का मकसद FDI आवेदन जमा करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस बनाना है. इसलिए, आवेदक को FDI प्रस्तावों को प्रोसेस करने के लिए जरूरी किसी भी दस्तावेज की फिजिकल कॉपी जमा करने की जरूरत नहीं होगी. DPIIT वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का एक हिस्सा है जो FDI से जुड़े मामलों को देखता है. नए SOP के अनुसार, सभी आवेदन विदेश मंत्रालय को भेजे जाएंगे ताकि वे उन निवेशों पर अपनी राय/मंजूरी दे सकें जो भारत के साथ जमीनी सीमा शेयर करने वाले देशों से आ रहे हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रस्ताव पर जिन मंत्रालयों और विभागों से सलाह ली जाती है जिनमें RBI, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय शामिल हैं उन्हें तय समय सीमा के अंदर अपनी राय देनी होगी. अगर तय समय के अंदर राय नहीं मिलती है, तो यह मान लिया जाएगा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है.

हाल में दी थी ढील

SOP में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेशों के लिए अलग से दिशानिर्देश भी शामिल हैं. पिछले महीने, सरकार ने उन विदेशी कंपनियों के लिए FDI नियमों में ढील दी थी जिनकी शेयरहोल्डिंग में चीन/हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है. इससे वे लागू क्षेत्रीय शर्तों और FDI सीमाओं के अधीन, ‘ऑटोमैटिक रूट’ के तहत भारत में निवेश कर सकेंगी. इसके अलावा, सरकार ने इन सात देशों के निवेशकों को कुछ खास क्षेत्रों/गतिविधियों में तेजी से मंजूरी देने का फैसला किया है.

इन सेक्टरों में कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग ; और इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं. इन सेक्टरों में पॉलीसिलिकॉन वेफर, एडवांस्ड बैटरी कंपोनेंट, रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट, और रेयर अर्थ प्रोसेसिंग भी शामिल हैं.

पोर्टल में जमा कराना होगा

इसके अलावा, इसमें कहा गया है कि जिन प्रस्तावों में कुल विदेशी इक्विटी निवेश 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा होगा, उन पर आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति फैसला लेगी. जिन आवेदनों के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी है, उन्हें Foreign Investment Facilitation/NSWS पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जमा करना होगा. संबंधित मंत्रालय और विभाग पोर्टल पर प्रस्तावों की जांच करेंगे. प्रस्ताव ऑनलाइन जमा होने के बाद, DPIIT संबंधित मंत्रालय की पहचान करेगा और आवेदन की प्रोसेसिंग और सेटलमेंट के लिए तय समयसीमा के अंदर उसे सौंप देगा. प्रस्ताव को टिप्पणियों के लिए RBI को ऑनलाइन भेजा जाएगा, और जिन आवेदनों के लिए सुरक्षा मंजूरी जरूरी होगी, उन्हें गृह मंत्रालय को भी भेजा जाएगा.

जमा करना होगा घोषणा पत्र

इसमें आगे कहा गया है कि अगर कोई आवेदक, निवेश पाने वाली कंपनी/निवेशक को दिए गए मंजूरी पत्र को वापस करना चाहता है, तो संबंधित मंत्रालय इसे स्वीकार कर सकता है, बशर्ते आवेदक इसके कारणों को साफ तौर पर बताते हुए एक घोषणा पत्र जमा करे. नई SOP के मुताबिक, MHA, MEA, और किसी भी अन्य संबंधित मंत्रालय/RBI/नियामक द्वारा टिप्पणियां जमा करने की समयसीमा आठ हफ्ते होगी. इस पर टिप्पणी करते हुए, थिंक टैंक GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह SOP FDI मंजूरी की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और पूरी तरह से डिजिटल बनाकर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाएगी, जिससे तय समयसीमाओं के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा.

काफी आसान हो जाएंगी चीजें

उन्होंने कहा कि हालांकि, एजेंसियों के बीच कड़ी जांचपड़ताल और सुरक्षा जांचों का मतलब है कि नियमों का पालन करना अभी भी मुश्किल बना रहेगा. भारत को इस दिशा में और आगे बढ़ना चाहिए नियमों को आसान बनाना, नियमों के पालन में आने वाली लागत को कम करना, और व्यापार करने की लागत को घटाना ताकि मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस्ड सेक्टर्स में हाईक्वालिटी वाला और लंबे समय तक चलने वाला निवेश आकर्षित किया जा सके.

अप्रैलफ़रवरी 202526 के दौरान, भारत में कुल FDI निवेश 88 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है. पिछली SOP 29 जून, 2017 को जारी की गई थी. उसके अनुसार, किसी FDI प्रस्ताव की मंजूरी के लिए अधिकतम 10 सप्ताह की डेडलाइन तय की गई थी. ज्यादातर सेक्टरों में विदेशी निवेश ‘ऑटोमैटिक रूट’ के तहत मंजूर है. फिलहाल, लगभग 11 सेक्टर्स—जिनमें रक्षा, ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट सर्विसेज, प्रिंट मीडिया और बैंक शामिल हैंमें FDI के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है.

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