किडनी के दुश्मन हैं ये 5 काम! डायटीशियन ने 10 साल के अनुभव से किया खुलासा; कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?​

हमारी रोजमर्रा की कई ऐसी आदतें जिन्हें हम सामान्य मानते हैं, लेकिन धीरेधीरे वो हमारी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। किडनी शरीर का अहम फिल्टर है, जो खून से गंदगी और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने का काम करती है। अगर समय रहते इसकी सही देखभाल न की जाए, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। रजिस्टर्ड डाइटीशियन और किडनी न्यूट्रिशन विशेषज्ञ Heather Smith ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए उन 5 आम गलतियों के बारे में बताया, जिन्हें वह पिछले 10 वर्षों से लोगों में लगातार देख रही हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी छोटीछोटी लापरवाहियां भी किडनी की कार्यक्षमता पर असर डाल सकती हैं।

किडनी के दुश्मन हैं ये 5 काम! डायटीशियन ने 10 साल के अनुभव से किया खुलासा; कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?​

किडनी की बीमारियों को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती चरण में आसानी से दिखाई नहीं देते। ऐसे में सही जानकारी और जागरूकता बेहद जरूरी हो जाती है। ज़ेन मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. असीम थंबा से इस जानकारी के बारे में जब हमने बात की तो उन्होंने बताया कि किडनी को हेल्दी रखने के लिए कई लोग सोशल मीडिया पर मौजूद अधूरी या भ्रामक जानकारियों पर भरोसा करने लगते हैं, जिससे फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है।

किडनी के लिए सही डाइट चुनना लोगों के लिए अक्सर मुश्किल बन जाता है। कोई केले खाने से मना करता है, कोई हाईप्रोटीन डाइट अपनाने की सलाह देता है, जबकि सोशल मीडिया पर प्लांटबेस्ड डाइट को हर समस्या का समाधान बताया जाता है। इन विरोधाभासी सलाहों के बीच कई लोग जरूरत से ज्यादा परहेज करने लगते हैं, जिससे वो कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। वहीं कुछ लोग लगातार इस डर में रहते हैं कि उनकी किडनी धीरेधीरे खराब हो रही है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि  Heather Smith ने जो जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट की है उसमें कितनी सच्चाई है।

पोटैशियम के डर से सब्जियां खाना बंद कर देना

किडनी की बात आते ही लोग अक्सर आलू, टमाटर, पालक, शकरकंद, बीन्स और केले जैसी पोटैशियम युक्त चीजों से दूरी बनाने लगते हैं। लेकिन डॉ. थांबा के अनुसार, अगर आपके शरीर में पोटैशियम का स्तर सामान्य है, तो इन चीजों को पूरी तरह छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने बताया कि ये खाद्य पदार्थ फाइबर, मैग्नीशियम, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट्स के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें छोड़ने से ब्लड प्रेशर, आंतों की सेहत और दिल की सेहत प्रभावित हो सकती है, जो किडनी हेल्थ से भी जुड़ी है। उनके मुताबिक किडनी हेल्थ के लिए ये सब्जियां नुकसान नहीं बल्कि सुरक्षा देती हैं।

यह मान लेना कि हर प्लांटबेस्ड चीज हेल्दी होती है

आजकल प्लांटबेस्ड डाइट काफी लोकप्रिय है, लेकिन हर प्लांटबेस्ड प्रोडक्ट किडनी के लिए सुरक्षित नहीं होता। डॉ. थांबा बताते हैं कि नकली मीट, वीगन चीज और पैकेज्ड स्नैक्स जैसी चीजें अक्सर अल्ट्राप्रोसेस्ड होती हैं, जिनमें सोडियम, फास्फोरस एडिटिव्स और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा अधिक होती है। अधिक सोडियम ब्लड प्रेशर और प्रोटीन यूरिया बढ़ा सकता है, जबकि फास्फोरस एडिटिव्स धीरेधीरे किडनी पर दबाव डालते हैं। एक्सपर्ट ने बताया अगर कोई चीज फैक्ट्री में बनी है, तो सिर्फ उस पर प्लांटबेस्ड लिखा होना उसे किडनीफ्रेंडली नहीं बना देता।

किडनी की जांच कराए बिना हाईप्रोटीन डाइट शुरू कर देना

आजकल हाईप्रोटीन डाइट को फिटनेस और वजन घटाने के लिए बहुत बढ़ावा दिया जाता है। लेकिन किडनी विशेषज्ञ इसके प्रति सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। डॉ. थांबा के अनुसार, स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रति किलो वजन पर 1.01.2 ग्राम प्रोटीन सुरक्षित माना जाता है। लेकिन अगर किसी को पहले से छिपी हुई क्रॉनिक किडनी डिजीज है, तो जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, खासकर प्रोटीन पाउडर, सप्लीमेंट्स और रेड मीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादा प्रोटीन किडनी के फिल्टर पर दबाव बढ़ाता है और कमजोर किडनी को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है।

डाइट को लेकर तनाव में खाना छोड़ देना

कई बार लोग यह सोचकर खाना स्किप करने लगते हैं कि उन्हें समझ नहीं आता क्या खाना सुरक्षित है और क्या नहीं। लेकिन डॉ. थांबा कहते हैं कि ऐसा करना नई समस्याएं पैदा कर सकता है। बारबार खाना छोड़ने से डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर और मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। डिहाइड्रेशन से किडनी तक रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जबकि ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का असंतुलन किडनी रोग का खतरा बढ़ाता है। उनके अनुसार समय पर संतुलित भोजन करना किडनी के ब्लड फ्लो और मेटाबॉलिज्म को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।

यह उम्मीद करना कि डॉक्टर एक परफेक्ट डाइट चार्ट दे देंगे

बहुत से लोग सोचते हैं कि डॉक्टर उन्हें एक तय डाइट चार्ट दे देंगे जिसे हमेशा फॉलो किया जा सके। लेकिन किडनी की डाइट इतनी सरल नहीं होती। डॉ. थांबा कहते हैं कि किडनी न्यूट्रिशन हर व्यक्ति में अलग होता है और यह उसकी रिपोर्ट, दवाइयों और बीमारी की स्टेज के अनुसार बदलता रहता है। सिर्फ इंटरनेट से मिली एक सामान्य जानकारी कि क्या खाएं और क्या न खाएं वाली सूची पर निर्भर रहना कई बार पोषण की कमी और अनावश्यक परहेज का कारण बन सकता है। एक्सपर्ट ने बताया किडनी को सिर्फ एक डाइट चार्ट नहीं, बल्कि डॉक्टर और मरीज के बीच सही समझ और साझेदारी की जरूरत होती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य सलाह है, किसी भी बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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