पाचन से जुड़ी ये 7 परेशानियां हो सकती है पेट के कैंसर का संकेत ? गैस्ट्रोएंटेरोलोजिस्ट से जानिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर दुनिया भर में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, जिसमें पेट का कैंसर सबसे घातक माना जाता है। भारत में भी खराब जीवनशैली और खानपान के कारण इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पेट के कैंसर के शुरुआती चरणों में आसानी से लक्षण नहीं दिखते, इसलिए अक्सर इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है या इसे नॉर्मल पाचन से जुड़ी दिक्कतें समझ कर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

पाचन से जुड़ी ये 7 परेशानियां हो सकती है पेट के कैंसर का संकेत ? गैस्ट्रोएंटेरोलोजिस्ट से जानिए

ठाणे स्थित KIMS Hospitals में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और एचपीबी ऑनकोसर्जरी की सलाहकार डॉ. सनेया पंड्रोवाला ने बताया कि पेट के कैंसर के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं जिनपर ध्यान देना आसान नहीं होता। डॉ. पंड्रोवाला ने बताया कई लोग लगातार अपच, थोड़ा सा खाना खाने के बाद भारीपन महसूस होना, या बिना किसी वजह के पेट फूलने की शिकायत करते हैं। ये सब परेशानियां दवाई से ठीक नहीं होती। डॉक्टर ने बताया पाचन से जुड़ी कुछ मामूली दिखने वाली दिक्कतें असल में शरीर का ‘वार्निंग सिग्नल’ हो सकती हैं? आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पेट के कैंसर के कौन कौन से लक्षण दिखते हैं।

पेट के कैंसर के शुरुआती लक्षण जिन्हें पाचन से जोड़ा जाता है

  1. डॉ. पंड्रोवाला ने कहा पेट के कैंसर का शुरुआती लक्षण भूख नहीं लगना हो सकता है। अगर आपको भूख नहीं लग रही है और साथ ही तेजी से वजन भी कम हो रहा है तो आप इसे नजरअंदाज नहीं करें।
  2. कुछ लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से में हल्की बेचैनी या हल्का दर्द महसूस करते है। ये लक्षण भले ही मामूली लगें, लेकिन इनका बने रहना परेशानी की बात है। एक्सपर्ट ने बताया ये दर्द कई हफ्तों तक नहीं जाता जिसे लोग पाचन और गैस से जोड़ लेते हैं। इस तरह के दर्द को नजरअंदाज नहीं करें।
  3. डॉ. पंड्रोवाला के अनुसार जैसेजैसे बीमारी बढ़ती है, लक्षण और स्पष्ट हो सकते हैं। इन लक्षणों में मतली, कभीकभी उल्टी होना, या खाना निगलते समय गले में अटकने जैसी दिक्कते हो सकती हैं।
  4. डॉ. पंड्रोवाला ने बताया कि कुछ मामलों में, लोगों को थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है, जो अक्सर पेट की परत से अनजाने में होने वाले रक्तस्राव के कारण होती है। इससे एनीमिया हो सकता है। इस थकान को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं जो सेहत के लिए घातक साबित होती है।
  5. दुर्लभ मामलों में, लोगों को काला, चिपचिपा मल या खून की उल्टी हो सकती है, जो गंभीर चेतावनी के संकेत हैं और जिनके लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
  6. डॉक्टर ने बताया ये समझना जरूरी है कि पेट में दिखने वाले ये सभी लक्षण पेट के कैंसर के हमेशा नहीं होते बल्कि गैस्ट्राइटिस या एसिड रिफ्लक्स जैसी स्थितियों में भी देखे जाते हैं। ध्यान देने की बात ये हैं कि लक्षण कितने समय तक रहते हैं और क्या वे समय के साथ बिगड़ते हैं।अगर लक्षण नए हैं, ठीक नहीं होते हैं और धीरेधीरे बिगड़ते जाते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए, खासकर 40 साल की उम्र के बाद गंभीरता से लेना जरूरी है।
  7. जिन लोगों को धूम्रपान की आदत है या लंबे समय तक हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर की फैमिली हिस्ट्री है जैसे जोखिम कारकों वाले लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

लक्षणों की पहचान और जांच क्यों जरूरी है?

पेट के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य गैस, अपच या एसिडिटी जैसे लग सकते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर शरीर में होने वाले बदलावों और लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में लगाया जा सकता है। शुरुआती चरण में कैंसर का इलाज अपेक्षाकृत आसान होता है और रिकवरी की संभावना भी बेहतर रहती है। डॉक्टर के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पेट दर्द, लगातार अपच, जल्दी पेट भर जाना, बिना वजह वजन घटना, भूख कम लगना, बारबार उल्टी या मल में खून जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

पेट के कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें एंडोस्कोपी सबसे महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। इस प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब के जरिए पेट के अंदर की स्थिति को देखा जाता है, जिससे सूजन, अल्सर या कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर बायोप्सी, ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच भी कराई जा सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि केवल एकदो लक्षणों पर ध्यान देने के बजाय शरीर के सामान्य पैटर्न को समझना ज्यादा जरूरी है। अगर आपके खाने की आदत, पाचन प्रक्रिया, भूख या वजन में लगातार बदलाव दिख रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य बदलाव किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और सही इलाज से पेट के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। कोई भी नई दिनचर्या या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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