
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। कल यानी 16 मई 2026, शनिवार को यह व्रत रखा जाएगा। वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। इस व्रत में सबसे महत्वपूर्ण कुछ नियम हैं, जिनका ध्यान रखना काफी जरुरी है, जिससे व्रत का पूरा फल मिले।
वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष और मां सावित्री की विधिवत रुप से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से दांपत्य जीवन काफी सुखी रहता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, इस व्रत में कुछ कार्यों को करना वर्जित माना जाता है और कुछ कार्यों करना आवश्यक होता है। आइए आपको बताते हैं व्रत पूजा के जरुरी नियम, जिनसे आपको शुभ फल मिलेंगे। आइए आपको वट सावित्री व्रत के नियम बताते हैं।
वट सावित्री व्रत के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
यदि आप वट सावित्री का व्रत रख रही हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि इस दिन किसी भी प्रकार से नकारात्मक विचार से बचना चाहिए। इसके साथ ही मन में लालच, क्रोध, ईर्ष्या आदि की भावना नहीं लाएं।
इस व्रत के वाले दिन भूलकर भी बाल या नाखून नहीं काटने चाहिए। ऐसा करने से व्रत का फल अधूरा रह जाता है। शुभ अवसरों व व्रत के दिन बाल व नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता है।
वट सावित्री व्रत के दिन गलती से भी काले, नीले या सफेद रंग के वस्त्र पहने से बचना चाहिए। ऐसा करने से शुभ नहीं माना जाता है। क्योंकि, कालेनीले जैसे गाढ़े रंग नकारात्मकता को आकर्षित करता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत वाले दिन अपने पति के साथ किसी भी प्रकार से बहस या विवाद न करें। इसके साथ ही उनकी बुराई किसी से भी नहीं करें।
वट सावित्री व्रत के दिन महिलाओं को दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है। इसके अलावा मैले वस्त्र धारण नहीं करें।
जब आप वट सावित्री व्रत कथा का पाठ कर रहे हों या उसे सुन रहे हों, तो उस बीच में अपने स्थान से उठकर नहीं जाना चाहिए। अन्यथा व्रत का फल अधूरा मााना जाता है।
वट सावित्री व्रत के दिन क्या करें
माना जाता है कि वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके साथ ही, इस दिन सोलह श्रृंगार करने का भी अत्यधिक महत्व बताया गया है।
वट सावित्री व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह पहले व्रत का संकल्प जरुर लेना चाहिए। जिसके बाद से विधिवत रुप से पूजा करनी चाहिए।
सावित्री मां की पूजा के बाद रोली, फूल, चना, जल, फूल, गुड़, मौली आदि से वट वृक्ष की विधिविधान से पूजा करें।
सावित्री देवी और वट वृक्ष की पूजा करने के बाद कच्चे सूत का धागा वट वृक्ष पर 5, 7, 11, 21, 51 या 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा करनी चाहिए। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। कच्चा सूत न होने पर कलावे का प्रयोग भी कर सकते हैं।
वट सावित्री व्रत पूजा में सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है उसे घर में अपनी सास, ननद या किसी सुहागन महिला को भेंट कर देना चाहिए।
इतना ही नहीं, वट सावित्री व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है। इस दिन चने का सेवन करके ही व्रत खोलने का विधान बताया गया है। इसलिए पहले से ही चने को भिगोकर रख लें।





