बीते कुछ सालों में महिलाओं में एग फ्रीजिंग का ट्रेंड काफी बढ़ा है. करियर, शादी में देरी जैसे कई वजहों से महिलाएं अपने एग फ्रीज करा लेती हैं, ताकि समय आने पर इनकी मदद से गर्भधारण कर सकें. एग फ्रीजिंग वो प्रोसीजर है जिसमें महिलाओं के अंडों को निकालकर बहुत कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में प्रेग्नेंसी के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि महिला कुछ कारणों से इन एग का यूज नहीं करती हैं. ऐसी स्थिति में क्या होता है इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.

सफदरजंग अस्पताल में महिला रोग विभाग में डॉ. सलोनी चड्ढा बताती हैं कि बीते कुछ सालों में का चलन बढ़ा है. कई निजी मेडिकल संस्थान और लैब इसको करते हैं. इसमें डॉक्टर महिला के शरीर से अंडों को निकालकर लैब में फ्रीज कर देते हैं. ये अंडे शरीर के बाहर स्टोर किए जाते हैं और कई सालों तक सुरक्षित रह सकते हैं. इनको इस तरह फ्रीज किया जाता है जिससे समय आने पर इनको लैब से निकालकर फिर से महिला में फर्टिलाइडज होने के लिए यूज किया जा सके.
अगर अंडों का इस्तेमाल न किया जाए तो क्या होता है?
डॉ सलोनी बताती हैं कि जो महिलाएं अपने एग फ्रीज कराती हैं अधिकतर मामलों में इनका यूज हो जाता है, लेकिन अगर महिला प्रेग्नेंसी प्लान नहीं कर रही है तो फिर कई ऑपशन होते हैं. इनमें महिला लैब को लिखित में यह बताती हैं कि वह कुछ कारणों से अंडों को यूज नहीं कर सकती हैं ऐसे में इनको खत्म किया जा सकता है. कुछ मामलों में अंडें रिसर्च के लिए भी यूज होते हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसके लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है. कुछ देशों में अंडों को दूसरी महिलाओं के लिए डोनेट करने का विकल्प भी मौजूद है. हालांकि भारत में इसके लिए सख्त नियम लागू होते हैं. ये सभी कानून आईसीएमआर की गाइड लाइंस के हिसाब से हैं.
एग फ्रीजिंग के क्या फायदे हैं
एग फ्रीजिंग का ये फायदा है कि महिला अगर देरी से मां बनने का प्लान कर रही है तो वह अपने फ्रीज किए गए एग को यूज कर सकती हैं. जैसे आजकल महिलाएं करियर बनाने के लिए देरी से बच्चा प्लान कर रही है तो वह समय पर अगर अपने एग फ्रीज कर लेती हैं तो जब चाहें प्रेगनेंसी धारण कर सकती हैं.





