क्या है रीजनरेटिव मेडिसिन, रीढ़ की हड्डी वाली बीमारियों में कैसे है फायदेमंद

रीढ़ की हड्डी में कई तरह की बीमारियां होती हैं. इनमें से एक होती है एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस. ये एक तरह की सूजन है, जो
रीढ़ और उसके नीचे वाले जॉइंट्स को प्रभावित करती है. यह आमतौर पर कम उम्र में शुरू होती है, लेकिन कई सालों तक इसका सही पता नहीं चल पाता है. इस वजह से कई मामलों में रीढ़ की हड्डी में जकड़न से लेकर दर्द बना रहता है. बीमारी के इलाज में भी काफी समय लगता है, लेकिन अब रीजेनेरेटिव मेडिसिन एक नई उम्मीद बनकर आई है. यह क्या है और इससे रीढ़ की इस बीमारी का इलाज कैसे होता है. इस बारे में जानते हैं.

क्या है रीजनरेटिव मेडिसिन, रीढ़ की हड्डी वाली बीमारियों में कैसे है फायदेमंद

अभी तककी इस बीमारी का इलाज करने के लिए दर्द और सूजन कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं. बायोलॉजिक थेरेपी और फिजियोथेरेपी भी शामिल होती हैं. ये तरीके जरूरी हैं, लेकिन ये शरीर के अंदर सेल्स में हो रहे असली नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं कर पाते. इस वजह से अधिकतर मामलों में इलाज के बाद भी दर्द शुरू हो जाता है. जब तक फिजियोथेरेपी करा रहे हैं तबतक तो आराम रहता है, लेकिन इसको छोड़ने के बाद दर्द फिर से शुरू हो जाता है. ऐसे में अब रीजेनेरेटिव मेडिसिन एक नई उम्मीद बनकर आई है.

रीजेनेरेटिव मेडिसिन क्या होती है?

क्रायोवीवा लाइफ साइंसेज़ में मेडिकल स्पोक्सपर्सन डॉ. गीतिका जस्सल बताती हैं किरीजेनेरेटिव मेडिसिन का मकसद सिर्फ लक्षण कम करना नहीं, बल्कि खराब हो चुके टिशू को ठीक करना भी है. शुरुआती रिसर्च में स्टेम सेल थेरेपी और इम्यून सिस्टम को संतुलित करने वाले नए तरीकों पर काम हो रहा है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इनसे सूजन कम करने, टिशू को ठीक करने और जोड़ों की मूवमेंट बेहतर करने में मदद मिल सकती है. हालांकि ये इलाज अभी पूरी तरह से आम इस्तेमाल में नहीं आए हैं और इन पर और रिसर्च की जरूरत है, लेकिन भविष्य में ये बीमारी को सिर्फ कंट्रोल करने के बजाय उसकी प्रगति को बदलने की उम्मीद देते हैं.

सिर्फ दवा नहीं है कारगर

एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस के कुछ मरीज यह सोचते हैं कि केवल दवाओं के जरिए इसको कंट्रोल या खत्म किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है. इसके लिए एक पूरा प्लान जरूरी होता है. इसमें जल्दी पहचान, नियमित जांच, फिजियोथेरेपी, सही पोश्चर होना जरूरी है.

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

लगातार रहने वाला पीठ दर्द

सुबह उठने पर जकड़न

थकान

शरीर की लचक कम होना

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