आमिर खान को इंडस्ट्री में ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ कहा जाता है, क्योंकि वह अपनी फिल्मों और किरदारों के लिए जीजान लगा देते हैं। अभिनेता कई बार यह भी कह चुके हैं कि वह अपनी फिल्मों से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं और उनकी असफलता उन्हें गहराई से प्रभावित करती है।

हाल ही में आमिर ने जी म्यूजिक कंपनी को दिए इंटरव्यू में एक बार फिर खुलासा किया कि जब उनकी फिल्में फ्लॉप होती हैं, तो वह डिप्रेशन में चले जाते हैं। इससे एक हफ्ते पहले उनके बेटे जुनैद खान ने भी बताया था कि आमिर उनकी फिल्म ‘‘ की असफलता को काफी बुरा मान रहे हैं।
आमिर खान ने बताया कि वह सच में डिप्रेशन की बीमारी की बात नहीं कर रहे, बल्कि अपनी भावनाओं को समझाने के लिए ऐसा कह रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी फिल्में उनके लिए बच्चे जैसी होती हैं, इसलिए जब कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो उन्हें बहुत दुख होता है।
उन्होंने कहा, “जब कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो मेरा दिल टूट जाता है। आखिरकार हम दर्शकों के लिए फिल्म बनाते हैं। जब लोग टिकट खरीदकर थिएटर में अच्छा समय बिताने आते हैं और उन्हें फिल्म पसंद नहीं आती, तो इसका मतलब हमारे काम में कहीं कमी रह गई। दर्शक जानबूझकर खराब फिल्म देखने नहीं जाते। अगर वे निराश होते हैं, तो गलती हमारी होती है।”
दुखी हो जाते हैं आमिर खान
उन्होंने आगे कहा, “जब मेरी कोई फिल्म नहीं चलती, तो मैं 23 महीने तक दुखी रहता हूं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। मेरे लिए फिल्म किसी बच्चे जैसी होती है। जब उसे लोग पसंद नहीं करते या वह फ्लॉप हो जाती है, तो बहुत दर्द होता है। मुझे लगता है कि अपनी हार का दुख मनाना जरूरी है। रो लेना और खुद को थोड़ा समय देना जरूरी होता है, ताकि इंसान उस दर्द से बाहर निकल सके और आगे बढ़ पाए।”
आमिर ने कहा कि वह अपनी फिल्मों को लेकर हमेशा ईमानदार रहते हैं। अगर उन्हें फिल्म का पहला कट पसंद नहीं आता, तो वह उसमें बदलाव करते हैं। उन्होंने बताया कि ‘डेल्ही बेली’, ‘तारे जमीन पर’ और ‘लापता लेडीज’ जैसी फिल्मों की एडिटिंग पर लंबे समय तक काम किया गया था।





