केला एक ऐसा फल जिसका सेवन स्वास्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसे ज्यादातर लोग अपने ब्रेकफास्ट में शामिल करते हैं। केला का सेवन आपने कई बार किया होगा लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि ये हमेशा टेढ़ा ही क्यों होता है। इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसे ‘ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षण’ कहा जाता है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि केला हमेशा टेढ़ा ही क्यों होता है।
ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। क्या है इसके पीछे का साइंस" loading="lazy" />1. गुरुत्वाकर्षण
ज्यादातर पौधों की जड़ें जमीन की ओर बढ़ती हैं और तना ऊपर की ओर। केले के मामले में, इसकी शुरुआत तो नीचे की ओर होती है, लेकिन जैसेजैसे फल बड़ा होता है, वह सूरज की रोशनी की तलाश में ऊपर की ओर मुड़ने लगता है। चूंकि केला भारी होता है और गुरुत्वाकर्षण उसे नीचे खींचता है, लेकिन पौधे की प्राकृतिक प्रवृत्ति उसे रोशनी की ओर ले जाती है, इस खिंचाव और संघर्ष के बीच केला मुड़ जाता है।
2. केले के बढ़ने की प्रक्रिया
केले के फल एक बड़े गुच्छे में लगते हैं जिसे ‘हैंड’ कहा जाता है। शुरुआत में केले छोटे कली जैसे होते हैं और नीचे की ओर लटकते हैं। जैसेजैसे फल का आकार बढ़ता है, इसमें मौजूद हार्मोन इसे सूर्य की रोशनी की ओर मुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश की ओर बढ़ने की इस “रस्साकशी” में केला बीच में से मुड़कर ऊपर की तरफ कर्व बना लेता है।
3. ऑक्सिन
पौधों में ऑक्सिन नाम का एक हार्मोन होता है जो उनकी ग्रोथ को नियंत्रित करता है। केले में यह हार्मोन असमान रूप से वितरित होता है। जब सूरज की रोशनी केले के एक हिस्से पर पड़ती है, तो ऑक्सिन दूसरे हिस्से में जमा हो जाता है, जिससे वह हिस्सा तेजी से बढ़ता है। ग्रोथ की इस असमान गति के कारण फल सीधा रहने के बजाय मुड़ जाता है।





