उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने दावा किया है कि पिछले 9 वर्षों में 17,043 पुलिस एनकाउंटर हुए, जिनमें 289 कुख्यात अपराधी मारे गए.

उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार ने दावा किया है कि पिछले नौ सालों में राज्य में अपराधियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है. सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 289 कुख्यात अपराधी मारे गए हैं. वहीं, साल 2026 के पहले पांच महीनों में ही 23 कथित अपराधी एनकाउंटर में ढेर किए जा चुके हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुल 17,043 एनकाउंटर अभियान चलाए हैं. इन कार्रवाइयों के दौरान 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 11,834 अपराधी घायल हुए. सरकार ने इन अभियानों को अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा बताया है. इन आंकड़ों के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में औसतन हर दिन लगभग पांच पुलिस मुठभेड़ हुई हैं.
योगी आदित्यनाथा ने कब ली थी मुख्यमंत्री पद की शपथ?
Yogi Adityanath ने 19 मार्च 2017 को पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उस समय भाजपा को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिली थी. इसके बाद 2021 में भाजपा दोबारा सत्ता में लौटी और योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला.
कितने पुलिसकर्मी हुए शहीद?
सरकारी बयान में कहा गया है कि इस अवधि में 18 पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान शहीद हुए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए.
लिस्ट में यूपी के कौनसे शहर टॉप पर?
- आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ जोन एनकाउंटर मामलों में सबसे आगे रहा. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यहां पुलिस ने कुल 4,813 मुठभेड़ अभियान चलाए. इन अभियानों के दौरान 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 3,513 अपराधी घायल हुए. वहीं, 97 कुख्यात अपराधियों को पुलिस ने मुठभेड़ों में मार गिराया. मेरठ जोन में कार्रवाई के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि दो पुलिसकर्मी शहीद हुए. राज्य में एनकाउंटर कार्रवाई के मामले में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा.
- वाराणसी जोन में कुल 1,292 मुठभेड़ हुईं. यहां 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 29 अपराधी मारे गए. इस दौरान 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए.
- आगरा जोन एनकाउंटर मामलों में प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा. यहां 2,494 मुठभेड़ अभियान चलाए गए, जिनमें 5,845 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. इन कार्रवाइयों में 968 अपराधी घायल हुए, जबकि 24 अपराधियों की मौत हुई. साथ ही 62 पुलिसकर्मी भी घायल हुए.
- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बरेली जोन में 2,222 मुठभेड़ों के दौरान 21 अपराधी मारे गए. वहीं, लखनऊ जोन में 971 मुठभेड़ों में 20 अपराधी ढेर हुए.
- गाजियाबाद कमिश्नरेट में 789 मुठभेड़ों के दौरान 18 अपराधियों की मौत हुई, जो प्रदेश के सभी कमिश्नरेट में सबसे ज्यादा संख्या रही.
- कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों के दौरान 12 अपराधी मारे गए. वहीं, लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधियों को मार गिराया गया. प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों के दौरान 11 अपराधियों की मौत हुई.
- इसी तरह आगरा कमिश्नरेट में 489 मुठभेड़ों में 10 अपराधी मारे गए.
- गौतम बुद्ध नगर में 1,144 मुठभेड़ों के दौरान 9 अपराधियों को ढेर किया गया.
- गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8 अपराधियों की मौत हुई.
- वाराणसी कमिश्नरेट में 146 मुठभेड़ों में 8 अपराधी मारे गए. प्रयागराज कमिश्नरेट में 150 मुठभेड़ों में 6 अपराधियों की मौत हुई.
- कानपुर कमिश्नरेट में 253 मुठभेड़ों में 4 अपराधी मारे गए.
एनकाउंटर के अलावा और कैसी कार्रवाई?
बयान में यह भी कहा गया कि एनकाउंटर के अलावा अपराधियों की संपत्तियां जब्त करने, गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसे प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की गई. सरकार के अनुसार, अपराधियों के खिलाफ चलाया गया यह अभियान केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में भी असरदार साबित हुआ है.
प्रेस नोट में कहा गया है कि पुलिस की तेज और सख्त कार्रवाई के कारण कई अपराधियों को राज्य छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है और उत्तर प्रदेश एक सुरक्षित तथा भयमुक्त राज्य के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है.





