गर्मियों का मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही अस्थमा जैसी सांस से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं। आमतौर पर लोग ठंड के मौसम को अस्थमा के लिए ज्यादा खतरनाक मानते हैं, लेकिन बढ़ती गर्मी भी इस समस्या को गंभीर बना सकती है। PSRI अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन, डॉ. नीतू जय कहती हैं कि बढ़ता तापमान, धूल, प्रदूषण और हवा में मौजूद एलर्जेंस अस्थमा मरीजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

बढ़ती गर्मी की वजह से फूलता है दम
गर्मी के मौसम में हवा शुष्क हो जाती है, जिससे सांस की नलियों में सूजन और जलन बढ़ सकती है। इसके अलावा, तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर को डिहाइड्रेट कर देती हैं, जिससे श्वसन तंत्र पर असर पड़ता है। कई बार अत्यधिक गर्मी के कारण जमीन से धूल के कण और प्रदूषण के तत्व हवा में ज्यादा फैल जाते हैं, जो अस्थमा अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं।
ओजोन स्तर का बढ़ना
एक्सपर्ट्स के अनुसार, गर्मी में ओजोन स्तर भी बढ़ता है, जो फेफड़ों के लिए हानिकारक होता है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यह गैस सांस की नलियों को संकुचित कर सकती है और अस्थमा के लक्षण जैसे खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ को बढ़ा सकती है। खासकर शहरों में रहने वाले लोगों को इस समस्या का ज्यादा सामना करना पड़ता है।
एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल
गर्मी के दौरान एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल भी एक वजह बन सकता है। अगर एसी की सफाई ठीक से न की जाए, तो उसमें जमा धूल और फंगस के कण हवा के जरिए शरीर में पहुंचकर एलर्जी और अस्थमा को बढ़ा सकते हैं। इसी तरह, अचानक ठंडे और गर्म वातावरण में आनाजाना भी सांस की समस्या को ट्रिगर कर सकता है।
कैसे करें बचाव?
अस्थमा मरीजों के लिए जरूरी है कि वे गर्मी के मौसम में कुछ सावधानियां बरतें। बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, धूल और प्रदूषण से बचें, और ज्यादा गर्मी के समय में बाहर जाने से परहेज करें। शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। घर में साफसफाई बनाए रखें और एसी या कूलर की नियमित सफाई करें।





