ईरान-अमेरिका के बीच डील टूटी! सीजफायर के बीच इजरायल की लेबनान पर भीषण बमबारी

Iran US Tension News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब शांति की उम्मीद और जंग की धमकी दोनों एक साथ चल रही हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि ईरान के साथ बातचीत ‘अच्छी’ चल रही है और डील संभव है, लेकिन दूसरी तरफ ईरान अभी भी अमेरिकी प्रस्ताव को विचाराधीन बता रहा है.

ईरान-अमेरिका के बीच डील टूटी! सीजफायर के बीच इजरायल की लेबनान पर भीषण बमबारी

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच एक 14पॉइंट समझौते की चर्चा तेज हो गई है. अमेरिकी मीडिया में खबर आई थी कि यह एक पेज का मेमोरेंडम हो सकता है, जो आगे की बड़ी डील का आधार बनेगा. हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं किया गया है और दोनों पक्षों के बीच कई बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. ईरान ने रिपोर्ट से इनकार किया है. इस बीच खबर आई है कि इजरायल ने सीजफायर के बावजूद लेबनान की राजधानी बेरूत में हमला किया है.

पाकिस्तान बना बीच का रास्ता
इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका भी अहम हो गई है. ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तान के जरिए ही अमेरिका तक पहुंचाएगा. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भी कहा है कि उनकी कोशिश युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की है. यानी यह सिर्फ दो देशों की बातचीत नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक खेल बन चुका है, जिसमें तीसरे देश भी अहम रोल निभा रहे हैं.

ट्रंप के बदले सुर
डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान कहा कि ‘पिछले 24 घंटों में बातचीत काफी अच्छी रही है और डील संभव है.’ लेकिन इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी भी दी थी कि अगर ईरान ने प्रस्ताव नहीं माना तो अमेरिका दोबारा बमबारी शुरू कर सकता है. यानी एक तरफ बातचीत की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव भी बरकरार है. यही डबल रणनीति इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना रही है.

क्या है डील का फॉर्मूला?
मध्यस्थता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच एक छोटे मेमोरेंडम पर सहमति बनने के करीब है. अगर यह साइन होता है, तो आगे 30 दिनों की विस्तृत बातचीत शुरू होगी. इसमें तीन बड़े मुद्दे शामिल होंगे.
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करना
ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाना
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं तय करना
हालांकि, अभी तक मिसाइल प्रोग्राम और मिडिल ईस्ट में ईरान के सहयोगी संगठनों को लेकर कोई साफ सहमति नहीं बनी है.
ईरान क्या कह रहा है
ईरान के नेताओं ने इस प्रस्ताव को लेकर खुलकर सवाल उठाए हैं. संसद की विदेशी मामलों की समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने इसे ‘अमेरिका की विशलिस्ट’ बताया.
तेल बाजार में बड़ा असर
इस संभावित समझौते की खबर का असर सीधे ग्लोबल मार्केट पर पड़ा. कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड करीब 11% तक गिर गया. हालांकि बाद में कीमतें थोड़ा संभल गईं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह युद्ध खत्म होता है और होर्मुज दोबारा खुलता है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है, जिससे कीमतों में स्थिरता आएगी.

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