देश के लिए एक और ख़तरा: भारत में ‘हॉट नाइट्स’ ने छीनी नींद, रातों की तपिश बढ़ा रही हैं बीमारियां

Rising Night Temperature in India: भारत में जलवायु परिवर्तन का चेहरा अब केवल तपती दोपहरों तक सीमित नहीं रह गया है। हालिया शोध और आंकड़े बताते हैं कि देश में अब रातें भी दिन की तरह झुलसाने लगी हैं। यह बदलता मौसम भारतीयों के स्वास्थ्य और देश की अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा प्रहार कर रहा है। देश के लगभग 70 प्रतिशत जिलों में ‘हॉट नाइट्स’ की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा सबब है।

देश के लिए एक और ख़तरा: भारत में ‘हॉट नाइट्स’ ने छीनी नींद, रातों की तपिश बढ़ा रही हैं बीमारियां

शरीर के लिए हानिकारक

‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ के एक गहन अध्ययन के मुताबिक, गर्म रातें मानव स्वास्थ्य के लिए दिन की गर्मी से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकती हैं। सामान्यतः रात के समय तापमान कम होने पर मानव शरीर दिन भर के ‘हीट स्ट्रेस’ से खुद को रिकवर करता है।

लेकिन जब रात का तापमान भी उच्च बना रहता है, तो शरीर की यह प्राकृतिक मरम्मत प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नींद न आने की समस्या बढ़ती है, जिससे हृदय रोग, मानसिक तनाव और सांस संबंधी बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

Climate: तापमान बढ़ने की रफ्तार हुई तीन गुना तेज

आंकड़ों के भयावह सच की बात करें तो वर्ष 2001 के बाद से भारत में तापमान बढ़ने की रफ्तार पहले की तुलना में तीन गुना अधिक तेज हो गई है। 2022 तक के पिछले एक दशक में भारत के 70 प्रतिशत जिलों ने औसतन पांच या उससे अधिक अतिरिक्त ‘बहुत गर्म रातों’ का सामना किया है। कई वर्षों में तो स्थिति यह रही कि बहुत गर्म रातों की संख्या, गर्म दिनों के आंकड़ों को भी पार कर गई।

247 बिलियन श्रम घंटे नष्ट होने की संभावना

केवल अस्पतालों की OPD तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने भारतीय श्रम शक्ति की कमर तोड़ दी है। वर्ष 1990 के दशक की तुलना में 2024 में एक औसत भारतीय 366 घंटे अधिक भीषण गर्मी के संपर्क में रहा।

‘लैंसेट काउंटडाउन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस अत्यधिक गर्मी के कारण वर्ष 2024 में लगभग 247 बिलियन संभावित श्रम घंटे बर्बाद हो गए। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसका सीधा और सबसे घातक असर कृषि तथा निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ा है।

–

हीटवेव का बढ़ता ग्राफ

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत ने औसतन 19.8 लू वाले दिनों का सामना किया। साल 2000 के बाद से स्थिति यह है कि एक औसत भारतीय प्रतिदिन सात घंटे से अधिक समय ऐसी गर्मी में बिताता है, जहां हल्की बाहरी गतिविधि भी स्वास्थ्य के लिए मध्यम से गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि कार्बन उत्सर्जन और जलवायु सुधारों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में रातों की यह तपिश और भी जानलेवा हो सकती है।

Leave a Reply