Bandar Review: फिल्म कम जेल पर बनाई डॉक्यूमेंट्री ज्यादा लगती है अनुराग कश्यप की ‘बंदर’, एंडिंग कर देगी निराश​

फिल्म: बंदर
निर्देशक: अनुराग कश्यप
कलाकार: बॉबी देओल, सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी, सबा आजाद और अन्य
रेटिंग: 2/5

Bandar Review: फिल्म कम जेल पर बनाई डॉक्यूमेंट्री ज्यादा लगती है अनुराग कश्यप की ‘बंदर’, एंडिंग कर देगी निराश​

अनुराग कश्यप अगर कोई मूवी लेकर आए, तो दर्शक यह जानते हैं कि वह किसी न किसी ऐसे विषय को उठाएंगे जिस पर लंबे समय तक बहस की जा सकती है। इस बार निर्देशक अपनी नई मूवी ‘बंदर’ में भी ऐसे ही एक विषय को दिखा रहे हैं, लेकिन उनकी मूवी देखने के बाद ऐसा लगा कि जैसे उन्होंने उस विषय को बीच में ही छोड़ दिया या फिर ये कहें कि यह मूवी थकाने का काम ज्यादा करती है। अगर आप भी बंदर देखने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले रिव्यू पढ़ लें।

क्या है फिल्म ‘बंदर’ की कहानी

‘बंदर’ की कहानी समर मेहरा के इर्दगिर्द घूमते हुए नजर आती है। समर कभी इंडस्ट्री का बड़ा सितारा हुआ करता था, लेकिन धीरेधीरे समय के साथ उसकी चमक फीकी पड़ने लग जाती है। वह अपनी गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिश करता है और अपनी डेटिंग ऐप पर मिली गर्लफ्रेंड ख़ुशी के साथ रहने लगता है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब एक रात पुलिस समर को उसके घर से पकड़ के ले जाती है। बाद में उसे पता चलता है कि गायत्री नाम की एक लड़की ने उस पर रेप का आरोप लगा दिया है।

यह भी पढ़ें:

गायत्री वो लड़की है, जो समर को उसी डेटिंग ऐप पर मिली थी। दोनों के बीच रिश्ता बना, लेकिन बाद में समर उसे ब्लॉक कर देता है, वहां से उसकी मुश्किलें शुरू हो जाती है। समर पुलिस वालों से कहता है कि उसने कुछ नहीं किया वह बेगुनाह है। लेकिन पुलिस उसे चैट के वो स्क्रीनशॉट दिखाती है, जो उसने गायत्री के साथ की थी। इसके बाद कहानी पुलिस हिरासत और जेल के अंदर होने वाली घटनाओं को दिखाती है।

कैसा है सितारों का अभिनय

बॉबी देओल ने फिल्म में शानदार अभिनय किया है। पिछले कुछ सालों में लोगों ने उन्हें सिर्फ खलनायक के अंदाज में देखा है, लेकिन इस बार उनका एक अलग ही रूप देखने को मिला। वह फिल्म में बहुत ही बेबस और बेचारे नजर आए। कुछ सीन में उनके एक्सप्रेशन काफी अच्छे थे कि डायलॉग की जरूरत ही नहीं पड़ी। वहीं, सबा आजाद फिल्म में तीन से चार बार ही नजर आती हैं।

इंद्रजीत सुकुमारन सीमित समय में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जेल के अंदर उनका किरदार फिल्म में थोड़ी एनर्जी लाता है। सान्या मल्होत्रा ने फिल्म में बॉबी देओल की बहन का किरदार निभाया है। उनका अभिनय अच्छा है। सपना पब्बी और अन्य कलाकार अपने हिस्से का काम ठीक से करते हैं, लेकिन कहानी उन्हें ज्यादा अच्छे से नहीं दिखा पाती।

कैसा है फिल्म का डायरेक्शन

अनुराग कश्यप का निर्देशन कई जगह प्रभावशाली है, तो कई जगह कमजोर भी नजर आता है। जेल वाले बहुत से सीन बेचैन करते हैं और व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। वहीं, लगभग 2 घंटे 20 मिनट की इस फिल्म में ज्यादातर कहानी बस जेल के अंदर की दिखाई गई है, जिसे देख कर मन में सवाल आया कि यह मूवी है या फिर जेल पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री।

कहां रह गई कमी

फिल्म का पहला भाग बहुत ही ज्यादा खींचा हुआ लगता है। ऐसा लगता है जैसे मानों बस कहानी को जबरदस्ती आगे बढ़ाया जा रहा है। जेल, अदालत और तारीख पर तारीख बस यही पहले पार्ट में ज्यादा नजर आता है। दूसरे पार्ट में लोगों को उम्मीद होती है कि शायद बॉबी देओल के किरदार को इंसाफ मिलेगा, लेकिन कहानी ऐसे खत्म होती है कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाएगा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि निर्देशक सवाल तो बड़े उठाते हैं, मगर उनके जवाब नहीं ढूंढ पाते।

फिल्म देखें या नहीं

अब बात आती है कि फिल्म देखी जाए या नहीं। तो अगर आप बॉबी देओल के फैन हैं और उनका अभिनय देखना चाहते हैं, तो जा सकते हैं। लेकिन अगर आप अनुराग कश्यप की फिल्म सोच कर एक गहरी और संतुलित कहानी की उम्मीद लेकर जाएंगे तो निराश हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें:

Leave a Reply