कैबरे डांसर बनी महारानी, महाराजा को हुआ शक, फिर हुई जिन्ना की एंट्री, मामला तलाक पर खत्म हुआ​

स्पेन के सम्राट एल्फोंसो तेरहवें की शादी में शिरकत करने गए कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह वहां डांस कर रही अनीता डेलगाडो पर रीझ गए. साथ भारत लाने को व्याकुल थे. खोमचा लगाने वाले उसके पिता की इजाजत के लिए पहुंचे. किसी तरह राजी किया. फिर शादी की. महारानी का दर्जा दिया. नया नाम प्रेम कौर मिला. आगे खटपट शुरु हुई. लंदन की यात्रा में एक रात होटल के कमरे से चंद घंटों के लिए महारानी के लापता होने के बाद तूफान आ गया. महाराज अब उन्हें साथ रखने को तैयार नहीं थे.

कैबरे डांसर बनी महारानी, महाराजा को हुआ शक, फिर हुई जिन्ना की एंट्री, मामला तलाक पर खत्म हुआ​

उसी होटल में टिके अपने दोस्त मुहम्मद अली जिन्ना की भी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे. जिन्ना महारानी के पक्ष में अड़ गए. आखिर में महाराजा को अलगाव की कीमत में सालाना गुजारा भत्ते के लिए राजी होना पड़ा. पढ़िए ये दिलचस्प किस्सा.

कैबरे डांसर पर महाराजा हुए लट्टू

1906 में स्पेन के सम्राट एल्फोंसो तेरहवें की शादी में दुनिया के तमाम देशों के राजा और बड़ी हस्तियां शिरकत करने पहुंची थीं. भारत की कई बड़ी रियासतों के राजाओं के साथ कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह भी इसमें शामिल हुए थे. शादी की धूमधाम के दौरान ही महाराजा सेविल में हर साल भव्य पैमाने पर होने वाले मेले को देखने भी गए.

इसी मेले के एक पंडाल में उन्होंने अनीता डेलगाडो का कैबरे डांस देखा. उन्हें डेलगाडो की सुंदरता के बारे में पहले से ही काफी कुछ बताया गया था. शुरुआत में जब वह अन्य डांसर्स के समूह में महाराजा के पास पहुंची तो उनका अधिक ध्यान आकर्षित नहीं कर सकी. लेकिन जब अकेले अपना जादू दिखाया तो महाराजा उस पर लट्टू हो गए. महाराजा ने जल्दी ही उससे नजदीकी बढ़ाना शुरू कर दिया.

कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह.

पहले से तीन बीवियां जानकर पिता भड़का

अनीता डेलगाडो की पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत कमजोर थी. पिता शहर में उबले आलू का ठेला लगाते थे. उस आमदनी से घर का खर्चा जुट नहीं पाता था. अनीता की आमदनी परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मददगार थी. इधर महाराजा अनीता को हासिल करने को व्याकुल थे. उधर अनीता भी उनकी तरफ खिंचती चली आ रही थी. लेकिन भारत जाने के पहले पिता की मंजूरी उसे जरूरी लग रही थी.

महाराजा ने पहल की. पिता से बेटी का हाथ मांगा. लेकिन उसने सीधे इंकार कर दिया. यह जानने के बाद कि महाराजा के पहले से ही तीन बीवियां हैं , वह और भड़क गया. लेकिन महाराजा ने हिम्मत नहीं हारी. बताया कि उसकी तीन बीवियों में अनीता जैसी सुंदर कोई नहीं है. अनीता ने भी पिता को भरोसा दिया कि महाराजा की अन्य बीवियों से उसे दिक्कत नहीं होगी. पिता को पर्याप्त आर्थिक मदद का भी भरोसा दिया. महाराजा ने आखिर में छह हजार डॉलर की रकम देकर अनीता के पिता को राजी कर लिया.

अनीता डेलगाडो.

कुछ सालों में उतरा जादू

भारत पहुंचकर महाराजा ने शादी रचाई. अनीता डेलगाडो को नया नाम महारानी प्रेम कौर मिला. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। कुछ सालों तक महाराजा उस पर खूब मेहरबान रहे. फिर जादू उतरने लगा. महाराजा को महारानी की आशनाई का शक भी शुरू हो गया. लंदन की यात्रा में एक रात दोनों के बीच झगड़े ने सब कुछ बेपर्दा कर दिया. महाराजा और महारानी वहां के सेवॉय होटल के अगल बगल के कमरों में रुके हुए थे. इन कमरों के बीच एक ड्राइंग रूम था. महाराजा का एक सेवक खुशाल सिंह देर रात तक गैलरी में ड्यूटी देता था.

एक रात उसने देखा कि महारानी अपने कमरे से निकल कर कहीं गईं. सोते हुए महाराज को जगा कर उसने जानकारी दी . ड्राइंग रूम पार कर महाराजा जब महारानी के कमरे में पहुंचे तो बत्तियां बुझी हुई थीं. बेड पर महारानी नहीं थीं लेकिन इस तरतीब से बिस्तर लगाया गया था, जिससे किसी के वहां सोने का अहसास हो.

उस रात होटल से महारानी कहां गईं थीं ?

रात के डेढ़ बजे महारानी की खोज शुरू हुई. होटल में रुके रियासत के अन्य अफसर भी इकट्ठे हुए. पौ फटने के करीब जब महारानी अपने कमरे में पहुंचीं तो गुस्से में उबलते महाराजा के तीखे सवालों ने उन्हें पस्त कर दिया. इस वक्त वे अस्तव्यस्त ड्रेसिंग गाउन में थीं. बाल बिखरे हुए थे. इतनी देर रात लापता रहने के सवाल पर उन्होंने सफाई में कहा कि नींद न आने के कारण अपनी फ्रांसीसी सहायिका के कमरे में चली गई थी.

महाराजा उस सहायिका व अन्य कमरों में पहले ही महारानी की खोज करा चुके थे. महारानी को झूठा बताते हुए महाराजा ने उस पर किसी अन्य के साथ रंगरेलियां मनाने का आरोप लगाया. काफी देर तक चले इस प्रपंच में रोते रोते महारानी फर्श पर गिर गईं. कोई बेवफाई न करने की उनकी सफाई महाराजा के गले नहीं उतरीं. अपने अफसरों में शामिल ब्रिटिश कर्नल एनरिकज को सुबह ही तलाक के कागज तैयार कराने का हुक्म देकर महाराजा अपने कमरे में सोने चले गए.

मुहम्मद अली जिन्नामहाराज और महारानी दोनों के मित्र थे.

जिन्ना का समझाना भी बेअसर

इस कांड के समय मुहम्मद अली जिन्ना भी इसी होटल में टिके हुए थे. वे महाराज और महारानी दोनों के मित्र थे. गुजरी रात के बवाल की जानकारी मिलने के बाद वे महाराजा के साथ बैठे और उनका गुस्सा शांत करने की काफी कोशिश की. जिन्ना ने उन्हें समझाया कि महारानी की बेवफाई का कोई ठोस सबूत नहीं है. रात में सिर्फ कुछ घंटे की नामौजूदगी तलाक का आधार नहीं हो सकती.

महाराजा कुछ सुनने को तैयार नहीं थे. कोई रास्ता न निकलता देख जिन्ना ने महारानी को उनकी हैसियत के मुताबिक गुजारे के लिए रकम चुकता करने की शर्त रखी. महाराजा के फूटी कौड़ी भी न देने के जवाब पर जिन्ना भड़क गए. कहा कि वे महारानी का मामला लंदन में भारत के मामले देखने वाले मिनिस्टर के सामने पेश कर उनकी ओर से पैरवी करेंगे.

प्रेमकथा का दुखांत

महाराजा के लगातार इनकार ने जिन्ना को काफी खफ़ा कर दिया. वो महारानी को हर्जाने के तौर पर रकम दिलाने के लिए पैरवी करते रहे. इस बीच एकदूसरे से खिंचे और नाराज महाराजा और महारानी होटल के अलग कमरों में रुके रहे. आखिर में जिन्ना कामयाब हुए. महारानी के लिए छत्तीस हजार सालाना भत्ता तय हुआ. उनके गर्भ से उत्पन्न अजीत सिंह के लिए अलग से चौबीस हजार की रकम निश्चित हुई. अजीत तब नाबालिग थे. बाद में महाराज उन्हें साथ ले गए और अन्य राजकुमारों की तरह ही उनका भी ख्याल रखा गया.

इस दुखांत प्रेमकथा ने कपूरथला राजपरिवार ने कई कसैली यादें पीछे छोड़ीं. महाराजा को अपनी दूसरी रानी के गर्भ से उत्पन्न बड़े बेटे महीजीत सिंह पर भी संदेह था कि उसके विमाता महारानी प्रेम कौर से नाजायज रिश्ते हैं. महीजीत सिंह को जब इसकी जानकारी मिली तो उसने आत्महत्या तक की धमकी दी. तलाक के बाद महारानी ने मैड्रिड के एक शानदार फ्लैट में अपना जीवन गुजारा. समयसमय पर महाराजा से मिले बहुमूल्य जेवररत्न और रकम उनके पास थी.

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