Chittoor News: आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं. यहां एक शातिर गिरोह ने किसी छोटेमोटे दस्तावेज पर नहीं, बल्कि सीधे जिला कलेक्टर के ही जाली हस्ताक्षर कर डाले. मामला धारा 22A के तहत प्रतिबंधित सूची में शामिल एक कीमती जमीन को अवैध रूप से बेचने और उसका पंजीकरण कराने से जुड़ा है.

गंगावरम क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित सर्वे नंबर 244/1 की 1.11 सेंट जमीन मंजूनाथ रेड्डी नाम के व्यक्ति की थी. यह जमीन सरकारी नियमों के अनुसार धारा 22A के तहत लॉक थी, जिसके कारण मालिक इसे बेच नहीं पा रहा था. दलालों और जालसाजों के एक गिरोह ने मंजूनाथ की इस मजबूरी का फायदा उठाया. उन्होंने प्रतिबंधित सूची से जमीन का नाम हटवाने और उसका रजिस्ट्रेशन कराने के एवज में 5 लाख रुपये का सौदा तय किया.
ऐसे रची गई जालसाजी की साजिश
इस बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए गिरोह ने राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर बैठक की. उन्होंने एक पुरानी आधिकारिक कार्यवाही कॉपी को उठाया और उसमें हेरफेर करके सर्वे नंबर और तारीखें बदल दीं. इसके बाद, आरोपियों ने जिला कलेक्टर के नाम का एक फर्जी कार्रवाई आदेश तैयार किया, जिस पर कलेक्टर के जाली हस्ताक्षर किए गए ताकि यह दिखाया जा सके कि जमीन अब प्रतिबंधित सूची से बाहर हो चुकी है.
सबरजिस्ट्रार की सूझबूझ से खुला राज
जालसाज इस फर्जी ऑर्डर कॉपी को लेकर जमीन का रजिस्ट्रेशन कराने पलामनेरू सबरजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे. लेकिन यहां उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया. दस्तावेजों की जांच के दौरान सबरजिस्ट्रार को संदेह हुआ, क्योंकि ऑर्डर कॉपी पर सिर्फ वर्ष 2024 लिखा था, लेकिन कोई स्पष्ट तारीख दर्ज नहीं थी.
संदेह गहराने पर सबरजिस्ट्रार ने इस प्रति को जिला रजिस्ट्रार कार्यालय भेजा, जहां से इसे अंतिम पुष्टि के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय भेजा गया. कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों ने तुरंत पहचान लिया कि यह आदेश पूरी तरह से फर्जी है और हस्ताक्षर जाली हैं.
पुलिस की कार्रवाई और इलाके में हड़कंप
मामला सामने आते ही जिला कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व अधिकारियों ने गंगावरम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर इस रैकेट में शामिल गिरोह के सदस्यों को हिरासत में ले लिया है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। फिलहाल, आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस खेल में विभाग के कौनकौन से अधिकारी शामिल थे. इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है.





