उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाया जा रहा है. इसके बावजूद जिले के 112 विद्यालय ऐसे हैं जहां कक्षा एक और छह में एक भी नए छात्र का प्रवेश नहीं हुआ है. यही नहीं 530 ऐसे विद्यालय हैं जहां पांच से कम नामांकन हुआ है, जबकि प्रत्येक विद्यालयों को ‘स्कूल चलो अभियान’ के प्रचार प्रसार के लिए शासन की तरफ से बजट भी जारी किए गए थे. इसको बेसिक शिक्षा अधिकारी ने गंभीरता से लिया है.

शिक्षा हर बालक और बालिका का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है की कोई भी बच्चा पैसे के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे. इसी को लेकर शासन स्तर पर 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाकर अधिक से अधिक बच्चों का परिषदीय विद्यालयों में एडमिशन कराने का अभियान चलाया गया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इस अभियान के लिए शासन स्तर से जिले में चलने वाले 2266 विद्यालयों को ₹2500 का बजट भी जारी किया गया. ताकि विद्यालय के अध्यापकों के द्वारा इस अभियान को बेहतर तरीके से चलाया जा सके. इस अभियान में एडमिशन के लिए शासन की तरफ से 63000 छात्रों के एडमिशन का लक्ष्य गाजीपुर को दिया गया, लेकिन अभी तक मात्र 27126 नए छात्रों का ही एडमिशन हो पाया.
112 स्कूल जिनमें नहीं हुए नए एडमिशन
इस अभियान में जहां प्रत्येक विद्यालय से ‘स्कूल चलो अभियान’ की रैली निकाली गई, वहीं कई रैलियां में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी के साथ ही बेसिक शिक्षा अधिकारी भी शामिल हुई. लेकिन नतीजा इस अभियान के समापन के बाद, जो प्रगति होनी चाहिए वह प्रगति अभी तक नहीं दिख रही है, जिसके नतीजा के रूप में अभियान के समाप्ति के बाद 27126 नामांकन ही पूर्ण हो पाया है.
ऐसे में यदि हम आंकड़ों की बात करें तो गाजीपुर में 112 ऐसे विद्यालय हैं जहां इस अभियान के बावजूद नामांकन जीरो रहा. वहीं 530 से ऊपर ऐसे भी विद्यालय रहे जहां पर पांच से कम नामांकन हुआ है. इन सबको देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने नामांकन संख्या में कमी होने को गंभीरता से लिया है और उन्होंने सभी विद्यालय के प्रधानाध्यापकों और खंड शिक्षा अधिकारियों को छात्रों का नामांकन अधिक से अधिक करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
स्कूलों को दो दिनों के अंदर नामांकन पूर्ण करने के निर्देश
विभागीय सूत्रों की बात माने तो पिछले साल भी ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाया गया था. लेकिन पिछले वर्ष कई छात्र ऐसे भी पाए गए थे जिनका नाम कई विद्यालयों में दर्ज था, जिसका खुलासा ‘यूडायस पोर्टल’ पर डाटा ऑनलाइन करने के दौरान सामने आया था. शायद यही कारण है कि इस वर्ष नामांकन करने की प्रक्रिया ऑनलाइन होने की वजह से काफी धीमी है.
बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने बताया कि जिन विद्यालयों के नामांकन संख्या जीरो है, उन सभी विद्यालय के प्रधानाचार्य को दो दिनों के अंदर नामांकन पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं. यदि नहीं किए जाते हैं तो उन सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य और संबंधित टीचर के वेतन रोके जाएंगे.





