गौर गोपाल दास: ‘क्यों’ कहना छोड़ दें, डूबने से बेहतर है उबरने का तरीका सीखें

आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास एक मोटिवेशनल स्पिकर भी हैं। वह न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में अपने अनमोल वचनों के चलते जाने जाते हैं। आज के आधुनिक युग में वह लोगों को आधुनिक तरीके से समस्याओं का समाधान करना सिखाते हैं। समस्या भला किसके जीवन में नहीं होती, लेकिन आगे वही बढ़ पाता है जो इसके पीछे की असल वजह समझ पाता है। गौर गोपाल दास के अनुसार आप बड़ी से बड़ी समस्या को आसानी से हल कर सकते हैं।

गौर गोपाल दास: ‘क्यों’ कहना छोड़ दें, डूबने से बेहतर है उबरने का तरीका सीखें

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि असफल होने पर या ऑफिस में तरक्की न मिलने पर लोग कहते हैं कि, यह मेरे ही साथ ‘क्यों’ हुआ, जबकि मैंने पूरी मेहनतलगन से काम किया और अपना 100 प्रतिशत दिया। कई बार असफल होने पर भी यही सवाल होता है कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है। रिश्ता टूटने पर भी यही सवाल होता है। गौर गोपाल दास इन सारी समस्याओं का बेहद ही सरल तरीके से हल बताते हैं।

सांप काटता है तो क्या उससे पूछते हैं
गौर गोपाल दास
कहते हैं कि जब किसी को कोई सांप काटता है, तो क्या आप उससे पूछने जाते हैं कि, तुमने मुझे क्यों काटा। वह कहते हैं कि सांप को पकड़कर आप उससे सवाल नहीं करते कि क्यों काटा। इसके बदले इलाज के लिए आप डॉक्टर के पास जाते हैं। उनके कहने का मतलब है कि जिस तरह सांप के काटने पर उससे सवाल नहीं करते, तो फिर किसी के बुरा करने पर आप क्यों सवाल करते हैं। इसके बदले यह खोजना चाहिए जो भी कुछ हुआ है, उसे आप कैसे सुधार सकते हैं, ऐसा क्या करें कि आगे इस तरह की चीजें आपके साथ न हो। कौन सी ऐसी गलती थी जिसकी वजह से आप असफल हुए। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जब आप क्यों को छोड़कर क्या की खोज में निकलते हैं तो कई सवाल मिलेंगे।

‘क्यों’ नहीं ‘क्या’ जरूरी है
गौर गोपाल दास भगवत गीता का उदाहरण देते हुए कहते हैं, गीता ‘क्यों’ के बारे में नहीं है बल्कि ‘क्या’ के बारे में है। गीता इस बारे में है कि जो कुछ भी हुआ है उसे बदला कैसे जा सकता है। वह आगे कहते हैं यह कभी न सोचें और पूछें कि आपके साथ ऐसा क्यों हुआ। बल्कि यह सवाल करें कि जो कुछ भी आपके साथ हुआ है अब उसके लिए ऐसा क्या करें कि वह फिर से न हो। क्यों के पीछे अपना समय बर्बाद न करें, बल्कि आप जो बदल सकते हैं उसके बारे में सोचेंगे तो कई जबाव मिलेंगे। इसलिए सबसे पहले क्यों कहना बंद कर दें।

सरल भाषा में समझे
जिस तरह सांप के काटने पर आप उससे सवाल नहीं करते ठीक उसी तरह समस्याओं के आने पर सवाल करने बजाए हल ढूंढें। खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें। पुरानी गलती को दोहराने से बचें। असफलता, दुख, धोखा या फिर अन्य बड़ी परेशानियां आने पर सबसे जरूरी है शांत रहना। सवालों का जवाब आपको शांत रहने पर ही मिलेगा। दूसरों को कोसने के बजाए आप उस सवाल के पीछे भागे कि किस तरह अपने रिश्ते को ठीक कर सकते हैं, ऐसा क्या करें जिससे दुख कम हो सके, क्या करें जिससे असफलता को सफलता में बदला जा सके।


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