2 लाख रुपये के पार जाएगा सोना? एक्सपर्ट ने बताया- इस वजह से आने वाली है तेजी​

सोने की कीमतों को लेकर एक ऐसा अनुमान सामने आया है जिसने बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें जल्द ही सारे रिकॉर्ड तोड़कर एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई को छू सकती हैं. सैक्सो बैंक के कमोडिटी स्ट्रैटजी हेड ओले हेनसेन ने अनुमान जताया है कि अगले 12 महीनों के भीतर ग्लोबल मार्केट में सोना 6000 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को पार कर सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो भारतीय बाजारों में भी सोने के भाव में जबरदस्त आग लगनी तय है.

2 लाख रुपये के पार जाएगा सोना? एक्सपर्ट ने बताया- इस वजह से आने वाली है तेजी​

भारतीय बाजार में 2.12 लाख का गणित

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 4490 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है. वहीं, घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.59 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है. अब निवेशक के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि अगर ग्लोबल मार्केट में भाव 6000 डॉलर तक जाता है, तो भारत में इसके क्या मायने होंगे?

इसका गणित सीधा है. 4490 डॉलर से 6000 डॉलर तक का सफर मौजूदा स्तर से करीब 33.6 फीसदी का भारी उछाल है. अगर भारतीय बाजार में भी इसी रफ्तार से तेजी आती है, तो सोने का भाव 1.59 लाख से बढ़कर सीधे 2.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच जाएगा. यानी प्रति 10 ग्राम पर सीधे 53 हजार रुपये की भारीभरकम बढ़ोतरी. हालांकि, भारत में अंतिम कीमत सिर्फ ग्लोबल प्राइस से तय नहीं होती. डॉलररुपये की चाल, इंपोर्ट ड्यूटी, जीएसटी जैसे घरेलू कारक भी इसे प्रभावित करते हैं, जिससे वास्तविक भाव थोड़ा ऊपरनीचे रह सकता है.

रिकॉर्ड तेजी लाने वाले 5 बड़े फैक्टर

ओले हेनसेन के मुताबिक, मौजूदा समय में ऊंचे बॉन्ड यील्ड, मजबूत अमेरिकी डॉलर से लेकर महंगाई तक का दबाव जरूर है. लेकिन, लंबी अवधि में कुछ बेहद मजबूत आर्थिक कारण सोने को लगातार सपोर्ट कर रहे हैं.

  1. सबसे पहला कारण डीग्लोबलाइजेशन है. सप्लाई चेन टूटने से देश अब एकदूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहते, जिससे सुरक्षित एसेट के तौर पर सोने की मांग बढ़ रही है.
  2. दूसरा बड़ा फैक्टर डीडॉलराइजेशन है. दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता घटा रहे हैं. वे रिजर्व के तौर पर जमकर सोना खरीद रहे हैं.
  3. तीसरा, महाशक्तियों पर बढ़ता भारीभरकम सरकारी कर्ज. आर्थिक दबाव के इस डर ने निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे करेंसी के बजाय सोने पर भरोसा जता रहे हैं.
  4. चौथा कारण पश्चिम एशिया का भूराजनीतिक तनाव है. युद्ध के माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर सुरक्षित जगह लगाते हैं.
  5. पांचवां कारण सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग है. शेयर या बॉन्ड बाजार के भारी उतारचढ़ाव के बीच सोने से ज्यादा सुरक्षित कोई और विकल्प फिलहाल नजर नहीं आ रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर

सोने की इस चाल में कच्चे तेल की भी बड़ी भूमिका होने वाली है. पश्चिम एशिया के तनाव, खासकर होर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण तेल बाजार भारी दबाव में है. ब्रेंट क्रूड अभी 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर मंडरा रहा है. रिपोर्ट बताती है कि अगर यह भूराजनीतिक तनाव थोड़ा शांत भी होता है, तब भी क्रूड का नया बेस 85 से 95 डॉलर के बीच ही टिकेगा. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। कच्चा तेल महंगा होने का सीधा मतलब है वैश्विक महंगाई का बढ़ना. महंगाई जितनी बढ़ेगी, निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के लिए उतनी ही तेजी से सोने की तरफ भागेंगे.

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