मई के महीने में डॉलर के सामने रुपए ने जबरदस्त मजबूती दिखाई दिया है. मात्र 5 कारोबारी दिनों में डॉलर के सामने रुपए में 1.25 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है. वो भी ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में लगातार परिस्थितियां बदल रही हो. कभी सीजफायर काा ऐलान होता है. तो कभी अमेरिका और ईरान की ओर से धमकियां दी जा रही हैं. जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भी काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है. अगर बात शुक्रवार की ही करें तो रुपए में डॉलर के मुकाबले में 71 पैसे का इजाफा देखने को मिला है. जबकि कच्चे तेल की कीमतें अभी 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा बनी हुई हैं.

वैसे इस हफ्ते में खाड़ी देशों का कच्चा तेज 115 डॉलर प्रति बैरल से 96 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंचा था. जिसकी वजह से रुपए को काफी सहारा भी मिला. वहीं दूसरी ओर इस हफ्ते में विदेशी निवेशकों ने कुछ दिन शेयर बाजार में खरीदारी भी. जिसका असर करेंसी मार्केट में भी देखने को मिला. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर डॉलर के मुकाबले में रुपए में किस तरह से इजाफा देखने को मिला है.
डॉलर के मुकाबले रुपए में 1.33 रुपए की तेजी
मई के महीने में डॉलर के मुकाबले में रुपए में 1.33 रुपए की तेजी देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो पिछले तहीने के आखिरी कारोबारी दिन डॉलर के मुकाबले में रुपया 94.84 के लेवल पर बंद हुआ था. जबकि 8 मई को जब बाजार बंद हुआ तो आंकड़ा 93.51 के लेवल पर आ गया था. इसका मतलब है कि डॉलर के मुकाबले में रुपए में 1.33 रुपए यानी 1.40 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. वैसे रुपए में तेजी के पीछे कई कारण माने जा सकते हैं. सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में कमी और आरबीआई का हस्तक्षेप है. कच्चे तेल के दाम में बीते कुछ दिनों में काफी गिरावट देखने को मिली है.
वहीं दूसरी ओर आरबीआई ने रुपए को संभालने के लिए करेंसी मार्केट में दखल दिया है. इसका कारण भी है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। रुपया डॉलर के मुकाबले में 95 के लेवल को पार करते हुए लाइफ टाइम लोअर लेवल पर पहुंच गया था. खास बात तो ये है कि इन पांच कारोबारी दिनों में सिर्फ एक दिन यानी 4 मई को रुपए में गिरावट देखने को मिली थी. उसके बाद लगातार तेजी बनी हुई है. 5 मई को 5 पैसे, 6 मई को 69 पैसे और 7 मई 27 पैसे की तेजी देखने को मिली थी. इसका मतलब है कि 4 कारोबारी दिनों में डॉलर के मुकाबले में 172 पैसे का इजाफा देखने को मिल चुका है.
मई के महीने में किस दिन आई तेजी और किस गिरावट
शुक्रवार को 71 पैसे का इजाफा
शुक्रवार को रुपया अपनी गिरावट से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 71 पैसे की तेजी के साथ 93.51 पर बंद हुआ. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि ईरान द्वारा अमेरिका पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाने के बाद निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हुईं, क्योंकि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट और नागरिक इलाकों में नए हमले किए थे, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सीजफायर अभी भी लागू है. ब्रेंट तेल की कीमतें, जो अमेरिकाईरान शांति समझौते के बीच गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थीं, थोड़ी बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं, क्योंकि निवेशक मध्यपूर्व शांति समझौते की संभावनाओं का आकलन कर रहे थे.
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.58 पर खुला, फिर इसकी गति धीमी पड़ गई और यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 94.68 के स्तर को छू गया, जो इसके पिछले बंद भाव से 46 पैसे की गिरावट दर्शाता है. हालांकि, इसने अपनी गिरावट की भरपाई की और शुक्रवार का सत्र 93.51 पर समाप्त किया, जो इसके पिछले बंद भाव से 71 पैसे की बढ़त है. गुरुवार को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे की बढ़त के साथ 94.22 पर बंद हुआ था.
कच्चे तेल से लेकर डॉलर तक का हाल
- इस बीच, डॉलर इंडेक्सजो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मज़बूती को मापता है—97.91 पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
- वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.81 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था.
- घरेलू शेयर बाज़ार की बात करें तो, सेंसेक्स 516.33 अंक गिरकर 77,328.19 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 150.50 अंक गिरकर 24,176.15 पर आ गया.
- एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 4,110.60 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
- RBI ने शुक्रवार को बताया कि 1 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 690.693 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया.
- इससे पिछले सप्ताहजो 24 अप्रैल को समाप्त हुआ थाकुल भंडार 4.82 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 698.487 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया था.
क्या कहते हैं जानकार?
मीराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और कमजोर घरेलू इक्विटी का भी रुपए पर दबाव पड़ा. हमें उम्मीद है कि पश्चिम एशिया युद्ध में नए भूराजनीतिक तनावों के बीच रुपया थोड़े नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार करेगा. कच्चे तेल की कीमतों में सुधार और कमज़ोर वैश्विक बाज़ार भी रुपउ पर दबाव डाल सकते हैं. विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली रुपए को और नीचे खींच सकता है. हालांकि, हमें किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. ट्रेडर्स अमेरिका से आने वाले नॉनफॉर्म पेरोल डेटा से भी संकेत ले सकते हैं. USDINR स्पॉट प्राइस 94.10 से 94.90 की रेंज में ट्रेड करने की उम्मीद है.





