इंडिगो का ‘फ्लाइट प्लान’: बंद हुए 6 इंटरनेशनल रूट्स, लेकिन 2030 तक आसमान पर राज करने की तैयारी​

भले ही देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो अच्छे दिनों से ना गुजर रहा हो, लेकिन कंपनी का दावा किया है कि साल 2030 तक अपने कारोबार को दोगुना कर ​लेगा. इंडिगो ने सोमवार को अपने ग्रोथ का एक बड़ा प्लान दुनिया के सामने रखा. कंपनी का मकसद वित्त वर्ष 2030 तक अपने कामकाज को लगभग दोगुना करना है. इसके लिए कंपनी इंटरनेशनल विस्तार, लंबी दूरी की उड़ानों, प्रीमियम ट्रैवल सर्विस और कमाई के नए ज़रिया पर ध्यान दे रही है, ताकि वह एक ग्लोबल एविएशन कंपनी बन सके.

इंडिगो का ‘फ्लाइट प्लान’: बंद हुए 6 इंटरनेशनल रूट्स, लेकिन 2030 तक आसमान पर राज करने की तैयारी​

यह रणनीति ऐसे समय में आई है जब इंडिगो मुश्किल हालात के बीच अपने इंटरनेशनल नेटवर्क को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है. इस महीने की शुरुआत में, एयरलाइन ने जुलाई और सितंबर के बीच छह इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के लिए उड़ानें कुछ समय के लिए रोकने का ऐलान किया था. इसकी वजह सीजन के हिसाब से कम मांग और “बहुत मुश्किल लागत वाले हालात” बताए गए थे. कंपनी ने यह भी कहा कि वह 31 अगस्त से मैनचेस्टर के लिए सर्विस बंद कर देगी और ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और एयरस्पेस से जुड़ी दिक्कतों की वजह से अपने छह ‘डैम्पलीज्ड’ बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में से एक को वापस कर देगी.

‘एनालिस्ट डे 2026’ में अपना विजन पेश करते हुए इंडिगो ने कहा कि उसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक सालाना लगभग 20 करोड़ यात्रियों तक पहुंचना है, जो वित्त वर्ष 2026 में 12.3 करोड़ थे. एयरलाइन की योजना रोजाना होने वाली उड़ानों की संख्या को अभी के 2,200 से बढ़ाकर लगभग 3,000 करने और अपने बेड़े को 550 से ज्यादा विमानों तक बढ़ाने की भी है.

कंपनी ने अपने वित्त वर्ष 2030 के विजन को “बड़े पैमाने और मजबूत असर” वाला बताया और कहा कि वह “एक अहम ग्लोबल एविएशन कंपनी बनने की राह पर है. इस नए आउटलुक के साथ, एयरलाइन अपनी कम लागत वाली बुनियाद को बनाए रखते हुए लंबी दूरी के इंटरनेशनल रूट, प्रीमियम ट्रैवल सेगमेंट, कार्गो ऑपरेशन और दूसरे संबंधित बिज़नेस में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रही है. सोमवार को सुबह 10.27 बजे BSE पर इंडिगो के शेयर 2.42 फभ्सदी गिरकर 4,370 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे.

इंटरनेशनल ग्रोथ पर खास जोर

इंडिगो के ग्रोथ के अगले फेज में इंटरनेशनल विस्तार सबसे अहम है. एयरलाइन को उम्मीद है कि 2030 तक उसकी कुल क्षमता में इंटरनेशनल क्षमता का हिस्सा लगभग 40 फीसदी होगा. वास्तव में वह एशिया, यूरोप और लंबी दूरी के दूसरे मार्केट में अपनी पहुंच बढ़ा रही है. अपनी इंटरनेशनल रणनीति के बारे में बताते हुए एयरलाइन ने कहा कि हमारा ग्लोबल ग्रोथ इंजन तेजी से घूम रहा है.

इंडिगो का इंटरनेशनल नेटवर्क वित्त वर्ष 2016 में पांच डेस्टिनेशन और 12 रूट से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 44 डेस्टिनेशन और 150 से ज़्यादा रूट तक पहुंच गया है. इस दौरान रोजाना होने वाली इंटरनेशनल उड़ानों की संख्या में लगभग दस गुना बढ़ोतरी हुई है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। एयरलाइन ने कहा कि वह “दुनिया भर में नई जगहों के लिए उड़ानें शुरू कर रही है” क्योंकि वह मिडिल ईस्ट, साउथईस्ट एशिया, सेंट्रल एशिया, अफ्रीका और यूरोप में नई जगहों को अपने नेटवर्क में जोड़ रही है.

लंबे सफर वाले विमान नए मार्केट खोलेंगे

इंटरनेशनल स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने में एयरबस A321XLR विमान और एयरबस A350 वाइडबॉडी जेट्स को शामिल करना एक अहम कदम होगा. इंडिगो को फाइनेंशियल ईयर 2027 में नौ A321XLR विमान मिलने की उम्मीद है. ये विमान लगभग 8.5 घंटे तक की उड़ान भरने में सक्षम हैं और एयरलाइन के मौजूदा एयरबस फ्लीट स्ट्रक्चर के साथ तालमेल बिठाते हुए एथेंस, इस्तांबुल, बाली और सियोल जैसी जगहों के लिए सर्विस शुरू करने में मदद करेंगे.एयरलाइन ने कहा कि ये विमान “लंबे सफर वाले लेकिन कम डिमांड वाले इंटरनेशनल मार्केट” और भारत में इंटरनेशनलटूइंटरनेशनल ट्रैफिक के बढ़ते मौकों को सपोर्ट करेंगे, साथ ही बिना किसी बड़ी ऑपरेशनल मुश्किल के कंपनी को विस्तार करने में मदद करेंगे.

प्रीमियम ट्रैवलर्स पर ज्यादा ध्यान

नेटवर्क बढ़ाने के साथसाथ, इंडिगो अपनी ‘इंडिगोस्ट्रेच’ सर्विस के जरिए प्रीमियम और बिजनेस यात्रियों पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है. एयरलाइन को उम्मीद है कि जैसेजैसे यह सर्विस ज्यादा विमानों और रूट पर फैलेगी, मार्च 2027 तक रोजाना प्रीमियम सीटों की संख्या मौजूदा 2,800 से बढ़कर 4,300 से ज़्यादा हो जाएगी. इंडिगो ने ‘स्ट्रेच’ को “खास मार्केट के लिए एक टारगेटेड प्रीमियम सर्विस” बताया है, क्योंकि वह अपनी वैल्यूफोकस्ड पहचान बनाए रखते हुए ज़्यादा कमाई वाले यात्रियों को आकर्षित करना चाहती है.

कार्गो और दूसरी सेवाओं से होगी ग्रोथ

एयरलाइन को उम्मीद है कि आने वाले सालों में कमाई में कार्गो और दूसरी सेवाओं से होने वाली आय का हिस्सा बढ़ेगा. अनुमान है कि कार्गो का वॉल्यूम वित्त वर्ष 2026 में लगभग 360,000 टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक 450,000 टन से ज्यादा हो हो जाएगी. इंडिगो ने कहा कि वह बेली कार्गो कैपेसिटी, फ्रेटर ऑपरेशन और भविष्य में वाइडबॉडी विमानों के इस्तेमाल के जरिए ग्लोबल पहुंच और क्षमता बढ़ाकर बड़े पैमाने पर कार्गो सेवा दे रही है.

कार्गो के अलावा, एयरलाइन ने कहा कि पिछले पांच सालों में प्रति यात्री एन्सिलरी रेवेन्यू में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसमें पेड सीटिंग, बैगेज प्रोडक्ट, अपग्रेड, AIबेस्ड सर्विस और मार्केटप्लेस ऑफरिंग का योगदान रहा है. इंडिगो ने कहा कि वह टिकट सेल्स से हटकर रेवेन्यू बढ़ाने के मकसद से “भविष्य के लिए तैयार एन्सिलरी इकोसिस्टम” बना रही है.

इस रणनीति में एयरलाइन के ‘ब्लूचिप’ लॉयल्टी प्रोग्राम की बड़ी भूमिका होने की उम्मीद है. इंडिगो ने कहा कि लॉन्च के 20 महीनों के भीतर ही इस प्रोग्राम के मेंबर्स की संख्या 11 मिलियन को पार कर गई है और यह एविएशन से हटकर एक इकोसिस्टम बनाने की उसकी कोशिश का हिस्सा है. कंपनी ने कहा कि वह फाइनेंशियल, ट्रैवल, लाइफस्टाइल और कॉमर्स पार्टनरशिप के ज़रिए “लॉयल्टीबेस्ड रिटेल इकोसिस्टम का विस्तार” करने पर ध्यान दे रही है.

अनुशासित ग्रोथ

तेजी से विस्तार के लक्ष्य तय करते हुए, इंडिगो ने बारबार इस बात पर जोर दिया कि ग्रोथ नपीतुली और आर्थिक रूप से अनुशासित रहेगी. एयरलाइन ने विज्ज वर्ष 2026 का समापन 362 अरब रुपए के फ्री कैश बैलेंस के साथ किया और कहा कि वह आर्थिक मजबूती बनाए रखते हुए फ्लीट, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और टैलेंट में निवेश जारी रखेगी. मैनेजमेंट ने कहा कि एयरलाइन की रणनीति “अनुशासन के साथ डाइवर्सिफिकेशन” और कॉस्ट लीडरशिप पर लगातार ध्यान देने पर आधारित है.

हाल के वर्षों में विमानों के ग्राउंडिंग, सप्लाईचेन की दिक्कतों और ऑपरेशनल रुकावटों से निपटने के बाद, कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 से क्षमता में बढ़ोतरी फिर से तेज होगी. आगे देखते हुए, इंडिगो ने कहा कि वह “सस्टेनेबल ग्रोथ” पर फोकस कर रही है. कंपनी अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ा रही है और एक बड़ी ग्लोबल एयरलाइन बनने के अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

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