सतना। कहते हैं प्यार अंधा होता है, इसे उम्र, जाति या धर्म की परवाह नहीं होती… कुछ ऐसा ही अनोखा मामला मध्य प्रदेश की सतना सेंट्रल जेल में सामने आया है, जहां असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ने उम्रकैद काट चुके कैदी से शादी कर ली है. प्यार की इस अनोखी दास्तां में मजहबी और सामाजिक बाधाओं को पीछे छोड़ दोनों एक दूजे के हो गए.

दरअसल, साल 2019 में फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल की असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट बनीं. इस दौरान उनकी मुलाकात जेल में धर्मेंद्र सिंह नामक एक कैदी से हुई.
धर्मेंद्र सिंह छतरपुर जिले के चंदला का रहने वाला है और साल 2007 में एक पार्षद की हत्या और शव दफनाने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था. जेल में रहते हुए धर्मेंद्र भी वारंट संबंधी कार्यों में फिरोजा की मदद करता था.
इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरेधीरे दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गई. फिरोजा और धर्मेंद्र ने अपने रिश्ते को एक मुकाम देने के लिए शादी करने का फैसला किया.
इधर, साल 2022 में धर्मेंद्र को 14 साल की सजा के बाद अच्छे आचरण के चलते जेल से रिहा कर दिया गया. इसके बाद धर्मेंद्र और फिरोजा ने अपने फैसले पर अमल किया.
दिलचस्प बात यह है कि लोकलाज से बचते हुए धर्मेंद्र ने अपना नाम बदलकर कार्ड छपाया और बीती 5 मई को छतरपुर जिले के लवकुश नगर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक शादी समारोह में फिरोजा से विवाह रचा लिया. ये खबर अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है.
इस अनोखी प्रेम कहानी में धर्म की दीवारें भी टूटती नजर आईं. बताया जा रहा है कि फिरोजा के मुस्लिम परिवार इस रिश्ते से खुश नहीं थे और उन्होंने शादी में हिस्सा नहीं लिया.
ऐसे में सतना विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर फिरोजा का कन्यादान किया और उन्हें अपनी बेटी के तौर पर धर्मेंद्र को सौंपा. शादी के मौके पर बजरंग दल के लोग भी मौजूद थे.
प्रेम की इस दास्तां को जानकर हर कोई हैरान है. सतना सेंट्रल जेल के अधिकारियों, कर्मचारियों और कैदियों ने भी नवविवाहित जोड़े को अपनी शुभकामनाएं दी हैं. चर्चित शादी अब इस बात की नजीर है कि प्रेम सामाजिक और धार्मिक बंधन से कही ऊपर है.
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