भोपाल एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने पहुंचे एक यात्री को ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि कथित हेरोइन और MDEA असल में अमचूर पाउडर और गरम मसाला था.

भोपाल एयरपोर्ट पर एक यात्री को ड्रग्स तस्करी के शक में गिरफ्तार करना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भारी पड़ गया. अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित अजय सिंह को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. ये मामला 7 मई 2010 का था, अजय को 2 जुलाई 2010 में रिहा किया गया था. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जिसके बाद अब इस मामले में मुआवजा देने का फैसला दिया है.
मामला उस समय शुरू हुआ जब अजय सिंह दिल्ली जाने के लिए भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे थे. फ्लाइट बोर्डिंग से पहले उनकी नियमित जांच की गई. इसी दौरान एयरपोर्ट पर तैनात CISF स्टाफ ने उन्हें हिरासत में ले लिया. आरोप लगाया गया कि उनके बैग से हेरोइन और MDEA जैसे नशीले पदार्थ मिले हैं. हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि जिन पैकेट्स को ड्रग्स समझा गया था, वे असल में अमचूर पाउडर और गरम मसाले के पैकेट थे.
क्या होता है हेरोइन और MDEA?
हेरोइन एक खतरनाक नशीला पदार्थ है, जो अफीम से तैयार किया जाता है और आमतौर पर सफेद या भूरे पाउडर के रूप में मिलता है. वहीं MDEA (Methylenedioxy-N-ethylamphetamine) एक सिंथेटिक ड्रग है, जो MDMA जैसी एम्फेटामाइन श्रेणी में आता है. इसे कई जगह “ईव” नाम से भी जाना जाता है.
क्या है पूरा मामला?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल एयरपोर्ट पर अजय सिंह के बैग की जांच के दौरान ETD मशीन में अलर्ट मिला. जांच में बताया गया कि उनके बैग में मौजूद ब्रांडेड अमचूर पाउडर के पैकेट में 1 से 4 प्रतिशत हेरोइन और गरम मसाला पैकेट में करीब 10 प्रतिशत MDEA होने के संकेत मिले. ETD मशीन एक अत्याधुनिक डिटेक्शन सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल ड्रग्स और संदिग्ध पदार्थों की पहचान के लिए किया जाता है.
मशीन में मिले संकेतों के आधार पर CISF कर्मियों ने अजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद जब्त किए गए पैकेट जांच के लिए भेज दिए गए. मामले में भोपाल के गांधी नगर थाने में अजय सिंह के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई.
फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आया?
रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किए गए पैकेट सबसे पहले रीजनल फॉरेंसिक लेबोरेटरी (RFL) भेजे गए. अजय सिंह के वकील का आरोप था कि लैब की ओर से जांच में काफी देरी की गई. बाद में लैब ने सैंपल वापस भेजते हुए कहा कि पर्याप्त उपकरण नहीं होने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी. इसके बाद सैंपल सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी (CFL), हैदराबाद भेजे गए.
CFL की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि जब्त किए गए पैकेट में किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ नहीं मिला. इसके बाद अजय सिंह को 57 दिन हिरासत में रहने के बाद रिहा कर दिया गया.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जस्टिस Deepak Khot की बेंच ने अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की गलती की वजह से अजय सिंह को बिना किसी दोष के 57 दिनों तक हिरासत में रहना पड़ा.
हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए. कोर्ट ने कहा कि आदेश जारी होने के तीन महीने के भीतर यह राशि अजय सिंह को उपलब्ध कराई जाए. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य में मानक स्तर की लैब सुविधाएं नहीं होने के कारण जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हुई.





