राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सालाना और मार्च तिमाही के GDP डेटा जारी करने की तारीख को मई के आखिरी कामकाजी दिन से बदलकर 7 जून कर दिया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, अगर 7 जून को छुट्टी होती है, तो डेटा उससे पिछले कामकाजी दिन जारी किया जाएगा. नतीजतन, वित्त वर्ष 202526 और मार्च तिमाही का GDP डेटा 5 जून को जारी किया जाएगा.

यह बदलाव राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति के साथ उचित परामर्श के बाद किया गया है, जिसका उद्देश्य डेटा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है. खास बात तो ये है कि उसी दिन देश का बैंकिंग रेगुलेटर आरबीआई की एमपीसी अपनी पॉलिसी का भी ऐलान करेगी. इसका मतलब है कि 5 जून की तारीख कई मामलों में काफी अहम होने जा रही है.
क्यों बढ़ाई गई तरीख
बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय … ने सालाना सकल घरेलू उत्पाद के अस्थायी अनुमानों और चौथी तिमाही के GDP के तिमाही अनुमानों को जारी करने की तारीख को मई के आखिरी कामकाजी दिन से बदलकर हर साल 7 जून कर दिया है. जारी करने की तारीख में बदलाव की जरूरत इसलिए पड़ी है, क्योंकि कुछ जरूरी डेटासेट दो महीने तक की देरी के बाद ही उपलब्ध हो पाते हैं.
ये भी है बड़ी वजह
खास तौर पर, लिस्टेड कंपनियों के लिए चौथी तिमाही और सालाना ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों को फाइल करने की कानूनी समय सीमा वित्त वर्ष खत्म होने के 60 दिन बाद तक होती है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में कंपनियां अपने वित्तीय विवरण 31 मई की समय सीमा के करीब ही जमा करती हैं. इसके अलावा, केंद्र सरकार के खातों के संबंध में, मार्च महीने के रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, कैपेक्स, करों, सब्सिडी और ब्याज भुगतानों से जुड़ा मुख्य राजकोषीय डेटा दो महीने की देरी के बाद ही अंतिम रूप ले पाता है और उपलब्ध हो पाता है. यह बदलाव राष्ट्रीय खातों को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले डेटा की गुणवत्ता, कवरेज और मज़बूती को बेहतर बनाने की दिशा में मंत्रालय के लगातार प्रयासों का ही एक हिस्सा है, और यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के भी अनुरूप है.





