35 की उम्र के बाद मां बनने का है प्लान? सरोगेसी से जुड़े मिथक, डॉक्टर से जानें किन बातों का रखें ध्यान​

35 की उम्र के बाद मां बनने का सपना देख रही हैं, लेकिन किसी मेडिकल वजह से प्रेग्नेंसी संभव नहीं हो पा रही? ऐसे मामलों में सरोगेसी कई महिलाओं और दंपतियों के लिए उम्मीद की नई राह बनकर सामने आई है. भारत में भी अबतक ये तकनीक काफी सफल रही है और कई महिलाएं मां बनने का सपना पूरा भी कर पाई हैं. 47 स्टडी में पाया गया है कि ज्यादातर दंपति को सरोगेसी का रिजल्ट अच्छा ही मिला है. हालांकि, अब तक सरोगेसी के जरिए कितनी महिलाएं मां बनी है इसका कोई सटीक आंकड़ा को जारी नहीं किया गया है. एक्सपर्ट का कहना है कि सरोगेसी एक जटिल मेडिकल और कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए इससे जुड़े तथ्यों को समझना बेहद जरूरी है.

35 की उम्र के बाद मां बनने का है प्लान? सरोगेसी से जुड़े मिथक, डॉक्टर से जानें किन बातों का रखें ध्यान​

भारत में सरोगेसी को लेकर नियम पहले से काफी सख्त हो चुके हैं. केंद्र सरकार ने 2021 में सरोगेसी लागू किया, जो जनवरी 2022 से प्रभावी है. इसके तहत कमर्शियल सरोगेसी पर प्रतिबंध है और केवल कानूनी शर्तों के तहत परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है. ऐसे में 35 की उम्र के बाद आप सरोगेसी के जरिए मां बनना चाहती हैं तो पहले कुछ जरूरी बातों और मिथक की सच्चाई को जानना बेहद जरूरी है.

सरोगेसी का पूरा प्रोसेस क्या है?

सरोगेसी एक ऐसा मेडिकल प्रोसेस है जिसमें किसी महिला जिसे सरोगेट मदर कहा जाता है की कोख में इच्छुक दंपति का भ्रूण स्थापित किया जाता है और वह बच्चे को जन्म देती है. आमतौर पर इसकी शुरुआत मेडिकल जांच से होती है, जिसमें इच्छुक मातापिता और सरोगेट महिला दोनों की स्वास्थ्य संबंधी जांच की जाती है. इसके बाद IVF तकनीक की मदद से महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को लैब में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है. तैयार भ्रूण को सरोगेट महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है. गर्भधारण सफल होने पर सरोगेट महिला पूरी गर्भावस्था के दौरान डॉक्टरों की निगरानी में रहती है और बच्चे के जन्म के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत नवजात को इच्छुक मातापिता को सौंप दिया जाता है. भारत में सरोगेसी के लिए सरकार ने कुछ तय नियम बनाए हैं. इस सुविधा का फायदा हर कोई नहीं उठा सकता, बल्कि केवल वही दंपति इसका इस्तेमाल कर सकते हैं जो कानूनी और मेडिकल शर्तों को पूरा करते हो. इसलिए सरोगेसी करवाने से पहले जरूरी दस्तावेज, मेडिकल जांच और कानूनी मंजूरी लेना जरूरी है.

क्या कहती हैं एक्सपर्ट?

मेडिवर्ल्ड फर्टिलिटी की डायरेक्टर डॉक्टर नेहा गुप्ता बताती हैं कि 35 साल उम्र होने के बाद महिलाओं की अंडेदानी कमजोर होने लगती है और उसमें जेनेटिक एबनोर्मेलिटी होने की संभावना बच्चे में बढ़ जाती है. इसलिए डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि 35 साल से पहले प्रेग्नेंसी प्लान कर लेनी चाहिए. लेकिन अगर महिला की कोख में कुछ समस्या है, बच्चेदानी हेल्दी नहीं है और कई बार कोशिश करने के बाद भी कंसीव नहीं हो पा रहा है तो मां बनने के लिए सरोगेसी एक अच्छा ऑप्शन है. ये प्रक्रिया पूरी तरह से लीगल है. हालांकि, सरोगेसी करना से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. उनके बारे में जान लेते हैं.

सरोगेसी के लिए क्याक्या नियम और शर्तें जरूरी हैं?

  • भारत में सरोगेसी के लिए कुछ और मेडिकल शर्तें पूरी करनी होती हैं. सबसे पहले इच्छुक दंपति को यह साबित करना होता है कि वे किसी चिकित्सकीय कारण से स्वयं बच्चे को जन्म नहीं दे सकते. इसके लिए संबंधित मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र लेना जरूरी होता है.
  • सरोगेसी की प्रक्रिया केवल रजिस्टर्ड अस्पतालों और फर्टिलिटी क्लीनिकों में ही कराई जा सकती है. प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज और कानूनी मंजूरी लेना अनिवार्य है.
  • भारत में कमर्शियल सरोगेसी की अनुमति नहीं है. केवल परोपकारी सरोगेसी ही कानूनी है, जिसमें सरोगेट महिला को गर्भावस्था से जुड़े मेडिकल खर्च और बीमा जैसी सुविधाएं दी जा सकती हैं.
  • सरोगेट महिला को भी तय मेडिकल मानकों पर खरा उतरना होता है. उसकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जांच की जाती है ताकि गर्भावस्था सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके.
  • सरोगेसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद मातापिता, सरोगेट महिला और चिकित्सा संस्थान को कानून में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ किसी भी कदम से पहले फर्टिलिटी डॉक्टर और कानूनी सलाहकार से पूरी जानकारी लेने की सलाह देते हैं.

सरोगेसी कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

मेडकिल जांच कराना जरूरी अगर आप भी सरोगेसी करवाना चाहती हैं तो इसके लिए पहले किसी एक्सपीरियंस फर्टिलिटी एक्सपर्ट से पूरी मेडिकल जांच करवानी जरूरी होती है. इससे ये पता लगता है कि आपकी स्थिति में सरोगेसी सफल हो पाएगी या नहीं.

कानूनी नियम और दस्तावेज की जानकारी सरोगेसी एक लीगल प्रोसेस है. ऐसे में इसे कराने से पहले कानूनी नियम और दस्तावेज की जानकारी लेना जरूरी है. अगर किसी भी नियम का पालन नहीं किया जाता है तो कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है.

कितना आएगा खर्च पूरी प्रक्रिया के खर्च, समय और संभावित चुनौतियों के बारे में पहले से जानकारी लेना जरूरी है. ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

सरोगेसी से जुड़े आम मिथक

मिथक 1: सरोगेट मदर ही बच्चे की असली मां होती है.

सच्चाई: जेस्टेशनल सरोगेसी में बच्चे का आनुवंशिक संबंध इच्छुक मातापिता से होता है. सरोगेट महिला केवल बच्चे को गर्भ में रखती है.

मिथक 2: सरोगेसी सिर्फ सेलिब्रिटीज के लिए होती है.

सच्चाई: सरोगेसी किसी भी ऐसे दंपति के लिए एक ऑप्शन हो सकती है, जिन्हें मेडिकल कारणों की वजह से गर्भधारण में दिक्कत होती है और जो कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं.

मिथक 3: सरोगेसी सबसे आसान तरीका है मांबाप बनने का.

सच्चाई: यह एक लंबी और हार्ड प्रोसेस है. जिसमें मेडिकल जांच, कानूनी औपचारिकताएं और कई स्टेप शामिल होते हैं.

मिथक 4: सरोगेसी में सफलता की गारंटी होती है.

सच्चाई: अन्य फर्टिलिटी उपचारों की तरह इसमें भी सफलता कई मेडिकल कारकों पर निर्भर करती है. हर कोशिश में गर्भधारण सफल हो, यह जरूरी नहीं है.

मिथक 5: 35 या 40 साल के बाद सरोगेसी ही एकमात्र ऑप्शन है.

सच्चाई: बढ़ती उम्र में भी कई महिलाएं प्राकृतिक रूप से या अन्य फर्टिलिटी उपचारों की मदद से मां बन सकती हैं. सरोगेसी का फैसला डॉक्टर की सलाह और मेडिकल स्थिति के आधार पर लिया जाता है.

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