दक्षिण भारतीय सिनेमा के दो दिग्गज कलाकार विजय और प्रकाश राज पर्दे पर अपनी शानदार जुगलबंदी जैसे ‘घिल्ली’ और ‘पोक्किरी’ के लिए जाने जाते हैं। हालांकि असल जिंदगी में राजनीति के मैदान पर इन दोनों के बीच के समीकरण थोड़े जटिल नजर आ रहे हैं। प्रकाश राज अक्सर विजय की अभिनय प्रतिभा की प्रशंसा करते रहे हैं, उन पर सुपरस्टार की राजनीति में एंट्री को लेकर अप्रत्यक्ष कटाक्ष करने के आरोप लगते रहे हैं। प्रकाश राज ने अक्सर फिल्मी सितारों के राजनीति में आने के चलन पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया है कि केवल ‘प्रसिद्धि’ सत्ता और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। हालिया चुनाव परिणामों के बाद उन्होंने के कामराज और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की हार का हवाला देते हुए टिप्पणी की थी कि समाज अब प्रशंसकसंचालित हो गया है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक जागरूकता पैदा करने का आग्रह करते हुए विजेताओं को शुभकामनाएँ भी दी थीं।

राज्यपाल की भूमिका पर उठे सवाल
वर्तमान में, तमिलनाडु की सत्ता को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन सरकार की चर्चाओं ने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। इस बीच राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ ने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम से यह साबित करने को कहा है कि उन्हें बहुमत वाले विधायकों का समर्थन प्राप्त है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, विजय जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात करेंगे ताकि उन्हें यह विश्वास दिला सकें कि उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल और क्षमता मौजूद है।
विजय के समर्थन में उतरे प्रकाश राज
भले ही प्रकाश राज ने पहले विजय की राजनीतिक पारी पर सवाल उठाए हों, लेकिन राज्यपाल के हालिया रुख पर उन्होंने विजय का खुलकर साथ दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने राज्यपाल पर निर्वाचित विधायकों के साथ खेल खेलने का आरोप लगाया और राज्यपाल के पद को ही समाप्त करने की मांग की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रकाश राज ने लिखा, ‘राज्यपाल का यह व्यवहार घिनौना, अस्वीकार्य और असंवैधानिक है। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं… लेकिन विजय को जनादेश मिला है। उन्हें सदन के पटल पर अपना दावा पेश करने का अधिकार मिलना चाहिए।’
चेन्नई में कौन सा खेल चल रहा है?
राज्यपाल की कार्यप्रणाली पर न केवल स्थानीय लोग, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार भी सवाल उठा रहे हैं। प्रकाश राज ने वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की एक पोस्ट को रीपोस्ट किया, जिसमें राज्यपाल के दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई गई थी। सरदेसाई ने सवाल किया था कि जब कोई अन्य पार्टी सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर रही है तो गोवा से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता और वर्तमान राज्यपाल विजय को इंतजार क्यों करवा रहे हैं? ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। चेन्नई के राजभवन में चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जहां एक तरफ सुपरस्टार का भविष्य दांव पर है तो दूसरी तरफ संवैधानिक मर्यादाओं पर बहस छिड़ गई है।





