मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग पर मौन… मदरसों की जांच पर सख्त, हाई कोर्ट की मानवाधिकार आयोग पर तल्ख टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मदरसा जांच के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्यशैली पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि वे मानवाधिकार आयोग द्वारा मदरसों की जांच के आदेश से “स्तब्ध” हैं. हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्यशैली पर सख्त रुख अपनाते हुए मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग का मामला भी उठा दिया.

मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग पर मौन… मदरसों की जांच पर सख्त, हाई कोर्ट की मानवाधिकार आयोग पर तल्ख टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट मदरसों की EOW से जांच के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग होती है तो मानवाधिकार आयोग मौन रहता है. बात जब मदरसों की जांच की आती है तो सख्त रुख अपना लिया जाता है. कोर्ट ने कहा अब अपनी ड्यूटी के बजाय मानवाधिकार आयोग मदरसों की जांच का आदेश दे रहा है. हाईकोर्ट की यह तल्ख टिप्प्णी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने मदरसों के मामले की सुनवाई के दौरान की. इस दौरान हाई कोर्ट ने मानवाधिकार आयोग द्वारा मदरसों की जांच ईओडब्ल्यू से कराए जाने के आदेश को प्रथम दृष्ट्या गैरकानूनी बताया है,

अब 11 मई को होगी सुनवाई

मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर राज्य सरकार ने ईओडब्ल्यू को 588 अनुदानित मदरसों की जांच सौंपी थी. हालांकि हाईकोर्ट ने मामले में फौरी तौर पर मदरसों की ईओडब्ल्यू से जांच के आदेश पर रोक लगा दी है. अब इस मामले में हाईकोर्ट 11 मई को मामले में अगली सुनवाई करेगा. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया और दो अन्य की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते यह आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने मानवाधिकार आयोग को नोटिस किया जारी

HC ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी करते हुए अपने वकील के जरिए कोर्ट के सामने पेश होने का भी आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने मदरसों की EOW द्वारा जांच पर पहले दिए गए अंतरिम आदेश को अगले आदेश तक बरकरार रखा है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। वहीं इस मामले में दोनों जजों के बीच मतभेद भी सामने आया है. यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की डिवीजन बेंच ने मदरसा टीचर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.

सुनवाई के दौरान जजों के बीच मतभेद

हालांकि इस मामले में सुनवाई करने वाली डिवीजन बेंच के दोनों जजों ने अलगअलग ऑर्डर पास किए है. NHRC पर टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अपने अलग आदेश में किया है. जस्टिस विवेक सरन ने अलग आदेश जारी कर कहा है कि वह जस्टिस श्रीधरन की पैरा 6 और 7 में की गई टिप्पणियों से सहमत नहीं है और इससे खुद को अलग कर रहे हैं. माना जा रहा है कि सुनवाई करने वाली बेंच में मतभेद होने से आगे यह मामला लार्जर बेंच को रेफर किया जा सकता है.

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