15 लाख की सैलरी पर भी लगेगा जीरो टैक्स! न्यू टैक्स रिजीम में इस ट्रिक से बचाएं अपनी पूरी कमाई​

नौकरीपेशा लोगों के लिए अपनी गाढ़ी कमाई को टैक्स से बचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता. आजकल ज्यादातर एंप्लॉयीज न्यू टैक्स रिजीम की तरफ अपना रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसके तहत 12.75 लाख रुपये तक की आय को पूरी तरह से टैक्स फ्री किया जा सकता है. लेकिन अगर आपकी सालाना सैलरी इससे थोड़ी ज्यादा है, तो क्या होगा?

15 लाख की सैलरी पर भी लगेगा जीरो टैक्स! न्यू टैक्स रिजीम में इस ट्रिक से बचाएं अपनी पूरी कमाई​

वित्त वर्ष 202627 के लिए लागू होने वाले नए इनकम टैक्स नियमों के तहत, अगर आप 31 जुलाई 2027 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं, तो 15 लाख रुपये के सीटीसी पर भी आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है. यह कोई जादू नहीं है, बल्कि आपके भत्तों का सही और सटीक गणित है.

सैलरी स्ट्रक्चर का वो फॉर्मूला जो बचाएगा आपकी पूरी कमाई

मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी 15 लाख रुपये है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अगर आप बिना किसी स्पेशल भत्ते वाली एक साधारण सैलरी लेते हैं, तो आपकी टैक्सेबल इनकम करीब 13.62 लाख रुपये बनेगी और आपको 87,000 रुपये से ज्यादा का टैक्स चुकाना पड़ेगा.

वहीं, ग्रांट थॉर्नटन भारत के एक आकलन के मुताबिक, अगर आप अपने एचआर से कहकर सैलरी स्ट्रक्चर में कुछ स्मार्ट बदलाव करवाते हैं, तो पूरी तस्वीर बदल जाएगी. मील कूपन, टेलीफोन बिल, कार मेंटेनेंस जैसे टैक्स फ्री रीइंबर्समेंट को सीटीसी में शामिल करने से आपकी टैक्सेबल सैलरी घटकर सीधे 7.5 लाख रुपये के दायरे में आ सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि आपको सरकार को एक रुपया भी टैक्स नहीं देना होगा, जिससे आपकी हर महीने की इनहैंड सैलरी में इजाफा हो जाएगा.

खाने के बिल पर मिलेगी शानदार टैक्स छूट

नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के बाद मील कूपन पर मिलने वाली छूट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इनकम टैक्स नियम 2026 के मुताबिक, अब मील वाउचर की टैक्स फ्री लिमिट 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है. यह नियम ऑफिस में खाने या वर्किंग आवर्स के दौरान पूरी तरह से मान्य है.

इसके अलावा, अगर आपकी कंपनी आधिकारिक कामकाज के लिए आपको लैपटॉप, टैबलेट या मोबाइल फोन देती है, तो इसे टैक्सेबल अनुलाभ नहीं माना जाता. वहीं, कंपनी द्वारा दिया जाने वाला जिम बेनिफिट या मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान भी नए रिजीम के तहत पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है.

कार मेंटेनेंस के साथ टेलीफोन खर्च भी है पूरी तरह टैक्स फ्री

ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल होने वाले टेलीफोन या इंटरनेट बिल का रीइंबर्समेंट दोनों ही टैक्स रिजीम में पूरी तरह से टैक्स फ्री रखा गया है, बशर्ते आप इसके असली बिल अपनी कंपनी में जमा करें.

बात अगर कंपनी की तरफ से मिली कार की करें, तो आधिकारिक काम के लिए इसका इस्तेमाल करने पर कोई टैक्स नहीं लगता है. यदि कार का इस्तेमाल पर्सनल और ऑफिस दोनों कामों के लिए हो रहा है, तो इंजन की क्षमता के हिसाब से टैक्स की कैलकुलेशन होती है. नए नियमों के मुताबिक 1.6 लीटर से कम क्षमता वाली या इलेक्ट्रिक कार के लिए 5,000 रुपये की कटौती तय है, जबकि उससे बड़ी कार के लिए 7,000 रुपये का नियम है. यदि कंपनी आपको ड्राइवर भी मुहैय्या कराती है, तो इसमें 3,000 रुपये अतिरिक्त जोड़े जाते हैं.

दफ्तर आनेजाने वाले सफर पर क्या कहते हैं नियम

आम तौर पर घर से दफ्तर जाने के लिए मिलने वाला कन्वेयंस अलाउंस नए टैक्स रिजीम में टैक्सेबल होता है. लेकिन, अगर आपको अपनी ड्यूटी के दौरान कहीं ट्रैवल करने के लिए कोई अलग से अलाउंस मिलता है और आप उसका बिल जमा करते हैं, तो वह छूट के दायरे में आता है.

वहीं, दिव्यांग कर्मचारियों के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस की सुविधा अब भी जारी है. इन्हें टैक्स में बड़ी राहत देते हुए मेट्रो शहरों में 15,000 रुपये और अन्य शहरों में 8,000 रुपये प्रतिमाह की विशेष छूट मिलती है.

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