क्या बिना हाई कोलेस्ट्रॉल के भी आ सकता है हार्ट अटैक?​

आज के समय में हार्ट अटैक की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं. हार्ट अटैक को अक्सर हाई कोलेस्ट्रॉल से जोड़कर देखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से नसों में फैट जमा हो सकता है, जिससे हार्ट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ता है. हालांकि दिल की सेहत केवल कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर ही निर्भर नहीं करती. हार्ट डिजीज के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं.

क्या बिना हाई कोलेस्ट्रॉल के भी आ सकता है हार्ट अटैक?​

यही वजह है कि कुछ लोगों में सामान्य स्तर होने के बावजूद भी हार्ट से जुड़ी गंभीर समस्याएं देखी जा सकती हैं. केवल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट को देखकर दिल की सेहत का पूरा आकलन नहीं किया जाता. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक का खतरा केवल एक कारण से नहीं जुड़ा होता. आइए जानते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल के अलावा हार्ट अटैक के पीछे कौन से अन्य कारण जिम्मेदार हो सकते हैं.

बिना हाई कोलेस्ट्रॉल के हार्ट अटैक आने के कौन से अन्य कारण जिम्मेदार हैं?

के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक का एक अहम जोखिम कारक है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है. संगठन के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, शारीरिक एक्टिविटी की कमी, तनाव और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारक भी हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

इसलिए हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन करते समय केवल कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं माना जाता. विशेषज्ञ ओवरऑल स्वास्थ्य स्थिति और लाइफस्टाइल को भी जरूरी मानते हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसी वजह से नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों की पहचान पर जोर दिया जाता है.

हार्ट अटैक के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

हार्ट अटैक से पहले कुछ लोगों में सीने में दर्द या दबाव महसूस होना, सांस फूलना, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, जबड़े, गर्दन, कंधे या बांह में दर्द जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं. हालांकि हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते.

कुछ मामलों में महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में लक्षण अलग या कम स्पष्ट हो सकते हैं. इसलिए अगर कोई असामान्य लक्षण बारबार दिखाई दे रहे हों, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए क्या करें?

दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित डाइट लें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान से बचें. साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें.

इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना, तनाव को कंट्रोल रखना और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति में हार्ट डिजीजके जोखिम कारक मौजूद हैं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समयसमय पर जांच और उपचार करवाना जरूरी है.

Leave a Reply