भारतीय फिल्मों के साथसाथ टीवी शो के भी कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को लांघकर अमर हो जाते हैं। जब भी टीवी की सबसे बड़ी ‘वैम्प’ या ‘लेडी विलेन’ की बात होती है, तो एक ही चेहरा जहन में उभरता है झुकी हुई नजरें, माथे पर बड़ी सी चमकती बिंदी, स्टाइलिश साड़ियां और बैकग्राउंड में बजता ‘निकाह…’ का म्यूजिक।

यह पहचान है ‘कोमोलिका बसु’ की, जिसे अभिनेत्री उर्वशी ढोलकिया ने अपनी अदाकारी से जीवंत कर दिया। ‘कसौटी जिंदगी की’ का यह किरदार आज भी ‘अमर किरदार’ की कैटेगरी में सबसे ऊपर है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। चलिए आपको अपने अमर किरदार कॉलम में अब हम इसी ‘कोमोलिका’ के बारे में बताते हैं, जिसे लोगों से नफरत भी मिली और कई बार तालियां भी।
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जब विलेन हीरोइन पर भारी पड़ी
साल 2001 में जब एकता कपूर का शो ‘कसौटी जिंदगी की’ शुरू हुआ, तो सेंटर में ‘प्रेरणा’ और ‘अनुराग’ की प्रेम कहानी थी, जिस श्वेता तिवारी और सीज़ेन खान ने निभाया था। लेकिन इस कहानी में असली जान तब आई जब ‘कोमोलिका’ की एंट्री हुई। उस दौर में टीवी पर बहुएं सीधीसादी और त्याग की प्रतिमूर्ति होती थीं, लेकिन कोमोलिका ने इस ढांचे को तोड़ दिया।
वह आत्मनिर्भर थी, चालाक थी और उसे अपनी खूबसूरती और पावर का बखूबी इस्तेमाल करना आता था। उर्वशी ढोलकिया ने इस किरदार को केवल निभाया नहीं, बल्कि जिया। उनकी डायलॉग डिलीवरी और आंखों के हावभाव ने कोमोलिका को एक आइकॉन किरदार बना दिया।
कोमोलिका का स्टाइल स्टेटमेंट
कोमोलिका सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि एक फैशन ट्रेंड बन गई थी। टीवी के पर्दे पर वैम्प्स को अक्सर गहरे मेकअप में दिखाया जाता था, लेकिन कोमोलिका ने इसे ‘ग्लैमरस’ बना दिया। उनकी सर्पाकार और डिजाइनर बिंदियां उस दौर में बाजार में ‘कोमोलिका बिंदी’ के नाम से बिकने लगी थीं।
इसके अलावा जैसे ही स्क्रीन पर उर्वशी की एंट्री होती थी, ‘निकाह…’ का म्यूजिक बजता था। यह शायद पहला मौका था जब किसी विलेन के सिग्नेचर ट्यून को इतनी लोकप्रियता मिली। वहीं, बैकलेस ब्लाउज और शिफॉन साड़ियों को पहन कोमोलिका ने वैम्प की परिभाषा ही बदल दी।
नफरत और तालियों का अनोखा संगम
एक कलाकार की सबसे बड़ी जीत तब होती है, जब लोग उसके किरदार की तारीफ करे, उससे नफरत करे। कोमोलिका के साथ भी यही हुआ। उर्वशी ढोलकिया ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि उस दौर में लोग उन्हें असल जिंदगी में भी कोमोलिका समझने लगे थे। लोग उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर देखकर मुंह फेर लेते थे या ताने मारते थे।
यह इस बात का सबूत था कि उनका अभिनय कितना प्रभावशाली था। जहां एक तरफ दर्शक उनसे नफरत कर रहे थे, वहीं क्रिटिक्स और इंडस्ट्री उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायिका के पुरस्कारों से नवाज रही थी। उर्वशी ने कई ‘बेस्ट खलनायिका’ के अवार्ड्स अपने नाम किए।
किरदारों की गहराई: सिर्फ बुराई नहीं, एक व्यक्तित्व
कोमोलिका के किरदार में कई परतें थीं। वह केवल अनुराग और प्रेरणा के बीच बाधा नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसी महिला थी जिसे हारना पसंद नहीं था। उसकी महत्वाकांक्षा और उसका अहंकार ही उसकी ताकत और कमजोरी दोनों थे।
उर्वशी ने इस अहंकार को अपनी आवाज की खनक और चलने के अंदाज में बहुत खूबसूरती से पिरोया था। आज के दौर में जहां कई एक्ट्रेसेज टाइपकास्ट होने के डर से नेगेटिव रोल नहीं करतीं, उर्वशी ने उस समय यह रिस्क लिया और साबित किया कि एक विलेन भी शो का असली ‘स्टार’ हो सकता है।
बता दें कि ‘कसौटी जिंदगी की’ के रीमेक में भी कोमोलिका के किरदार को लाने की कोशिश की गई, लेकिन जो प्रभाव उर्वशी ढोलकिया ने छोड़ा था, उसे दोहराना नामुमकिन रहा। वह एक ऐसा बेंचमार्क बन गईं कि आज भी जब किसी शो में कोई नई वैम्प आती है, तो उसकी तुलना अनजाने में ही कोमोलिका से हो जाती है।
उर्वशी ने कोमोलिका के जरिए यह दिखाया कि एक महिला कलाकार केवल रोनेधोने वाले किरदारों तक सीमित नहीं है। वह सत्ता, राजनीति और षड्यंत्रों की दुनिया में भी अपनी जगह बना सकती है और दर्शकों को अपनी उंगलियों पर नचा सकती है।
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