आयुर्वेद कहता है कि हर इंसान की एक खास प्रकृति होती है, जिसमें पित्त, वात और कफ दोष में से कोई एक दोष की अधिकता पाई जाती है। ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि शरीर में कौन सा दोष बढ़ा हुआ है। हालांकि खानपान और कुछ आदतों पर गौर करने से इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है। अगर आपके शरीर में आलस है, सर्दी जुकाम बना रहता है, आपकी धीमी चाल है और स्वभाव गंभीर है तो ये दिखाता है कि आप कफ प्रकृति के हैं। आइये जानते हैं कफ दोष को कैसे कंट्रोल करें, ऐसे लोगों को क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।

शरीर में कफ दोष बढ़ने के लक्षण
आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि आपके स्वास्थ्य को शरीर में पाए जाने वाले त्रिदोष यानि वात, पित्त और कफ ही बैलेंस करते हैं। जब भी शरीर में किसी एक दोष की वृद्धि होती है तो शरीर उससे जुड़े संकेत बीमारियों और परेशानियों के रूप में देने लगता है। शरीर में कफ दोष बढ़ने पर शरीर की स्थिरता और पोषण पर भी प्रभाव पड़ने लगता है। ऐसे लोग मोटे होने लगते हैं, धीरेधीरे वजन बढ़ता है और सुस्ती बनी रहती है। ऐसे लोगों का स्टेमिना कम होता है और थकान बनी रहती है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इन लोगों को सर्दीजुकाम लगा रहता है। ऐसे लोगों में बलगम की समस्या रहना आम बात है। कफ बढ़ने से पाचन शक्ति कमजोर होने लगती है।
कफ होने पर किन चीजों से परहेज करें?
कफ दोष को कंट्रोल करना है तो खाने में से दही, चीनी और ठंडे ड्रिंक हटा दें। ऐसे लोगों को ज्यादा तलाभुना खाने से भी बचना चाहिए। कफ दोष वालों को अपने आहार में दूध से बनी चीजें शामिल करनी चाहिए। जिससे कफ दोष बैलेंस रहे। इसके साथ ही लाइफस्टाइल में सुधार करने से भी कफ को काफी कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे लोगों को सुबह जल्दी उठना चाहिए और उठकर गर्म पानी का सेवन करना चाहिए। खाने में तेल मसाले का इस्तेमाल कम से कम करें। इससे कफ विकार को काफी कंट्रोल किया जा सकता है।
कफ के रोगियों को क्या खाना चाहिए?
आयुर्वेद में कफ दोष को कंट्रोल करने के लिए कई खाद्य पदार्थों का सेवन बताया जाता है। ऐसे लोगों को ज्यादा भारी खाना खाने की बजाय हल्का और सुपाच्य भोजन खाना चाहिए। ऐसे लोगों को खाने में मूंग की दाल, अदरक की दाल, हल्दी, काली मिर्च और लहसुन जैसी चीजें शामिल करनी चाहिए। इसके साथ ही रोजाना एक्सरसाइज करना भी कफ को बैलेंस करता है। कफ को कंट्रोल करने के लिए खाने में बाजरा, मक्का, गेंहूं, किनोवा ब्राउन राइस शामिल करें। हरी सब्जियों में पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली, हरी सेम, शिमला मिर्च खाएं। सीमित मात्रा में मटर, आलू, मूली, चुकंदर का सेवन कर सकते हैं। जैतून का तेल और सरसों का तेल खाने में उपयोग करें। नमक का सेवन कम करें और पुराना शहद डाइट में शामिल करें।





