भारत की बढ़ी मुश्किलें, रूस से अब और नहीं खरीद पाएगा सस्ता तेल, अमेरिका ने बंद किए छूट के दरवाजे!


अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन रूसी और ईरानी तेल पर दी गई प्रतिबंधों की छूट की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि रूसी और ईरानी तेल के लिए जारी सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। प्रशासन का यह कदम संकेत देता है कि अब वह ऊर्जा की कीमतों को कम करने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की रणनीति पर काम नहीं करेगा।

भारत को मिला था बड़ा लाभ
हाल के महीनों में इन छूटों का सबसे अधिक लाभ भारत को हुआ था। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उत्पन्न बाधाओं के बावजूद भारत रूसी तेल की खरीद जारी रख सका था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस राहत अवधि के दौरान भारतीय रिफाइनरों ने लगभग 30 मिलियन बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए थे।

शुरुआत में रिलायंस जैसी प्रमुख भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिकी दबाव के चलते रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी, लेकिन जल्द ही रणनीति बदलते हुए आयात में फिर से तेजी ला दी। इसी दौरान लगभग सात सालों के अंतराल के बाद ईरान से कच्चे तेल की खेप लेकर दो सुपरटैंकर भी भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे, जो भारत के लिए व्यापारिक दृष्टि से काफी अनुकूल रहा।

बता दें कि मार्च में जब ईरान ने होर्मुज मार्ग पर नियंत्रण सख्त किया था, तब अमेरिका ने ऊर्जा संकट से बचने के लिए 30 दिनों का लाइसेंस जारी किया था। इस लाइसेंस के तहत 12 मार्च से पहले लादे गए रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई थी और यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई।

ईरानी तेल के लिए भी इसी तरह की एक छूट 20 मार्च को ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी की गई थी, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच सका और युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने में मदद मिली। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।

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