How to improve your child’s thinking ability: अच्छे नंबर तो बच्चा किताबों को पढ़कर ला सकता है, लेकिन ये लाइफ में ग्रो करने की गारंटी नहीं है. इसी के साथ जरूरी है कि बच्चे की सोचनेसमझने की ताकत अच्छी हो. ये कोई एक दिन कि प्रैक्टिस नहीं होती है. मातापिता इस तरह से बच्चे को तैयार करना होता है कि वह बिना किसी झिझक के अपने विचारों को दूसरे के सामने रख सके और लाइफ में फैसले लेने में मजबूत हो. इस आर्टिकल में हम पेरेंट्स की ऐसी 5 हैबिट्स के बारे में जानेंगे जो बच्चे की थिंकिंग पावर को अच्छा करेंगी.

बच्चों को कुछ भी सिखाने के लिए पेरेंट्स का रोल सबसे ज्यादा अहम होता है. अगर डेली रूटीन में मातापिता अपने बिहेवियर में कुछ छोटेछोटे चेंज करते हैं तो बच्चे में खुद सोचने और अपने फैसलों पर भरोसा करने में मदद कर सकते हैं. तो चलिए जान लेते हैं इसके बारे में डिटेल के साथ.
खुद के फैसले लेने दें
अगर कोई ओपिनियन देते हैं और हमें अच्छा न लगे तो हम उसके सामने मना कर देते हैं, लेकिन ये सही नहीं है. बच्चे को अपनी उम्र के मुताबिक फैसले लेने के लिए फ्री छोड़ें. जैसे वो कैसे कपड़े पहनना चाहते हैं. कौन सा सब्जेक्ट पसंद है वो आगे क्या करना चाहते हैं. हां आप उन्हें इन सारी चीजों के बीच ऑप्शन दे सकते हैं. इससे वो सही फैसला ले पाएंगे और उनमें फैसले लेने की क्षमता के साथ ही कॉन्फिडेंस बिल्ड होगा.
खुद ढूंढने दें जवाब
बच्चा जब कोई सवाल पूछता है तो उसे उसका शांति के साथ पूरा एक्सप्लेन करके उत्तर दें, लेकिन हमेशा हर सवाल का उत्तर देने की बजाय आप उन्हें सवालों के आंसर खुद ही ढूंढने के लिए मोटिवेट करें. इसके लिए आप बच्चे से पूछ सकते हैं कि पहले वो बताए कि उसका अपना क्या ऑब्जर्वेशन है. जैसे तारे आकाश में क्यों चमकते हैं? तो आप पूछे कि बच्चे को क्या समझ में आया. इसके बाद उसे इस सवाल का उत्तर दें.
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गलतियां करने दें, ये भी जरूरी…
हम अक्सर ध्यान जाते ही बच्चे को गलती करने से पहले ही रोकनेटोकने लगते हैं. इस वजह से वह डरने लगते हैं, लेकिन जब बच्चा गलती करे तो ये बताने की बजाय कि क्या गलती है, उसे ये बताएं कि क्या नहीं करना चाहिए था कि ऐसी गलती न हो और वो अब क्या सुधार कर सकता है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ऐसे में किड्स में सीखने की क्षमता का विकास होता है और वो चीजों को बेहतर तरीके से देखने की आदत डालते हैं.
खुद बनें उनकी इंस्पिरेशन
बच्चे मातापिता देखकर बहुत कुछ सीखते हैं. इसलिए उनमें थिंकिंग पावर डेवलप करने के लिए आप उनकी इंस्पिरेशन बनें. जब भी आप कोई फैसला लें तो बच्चों को बताएं कि आपने ये फैसला क्यों लिया है. इससे कैसे प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती है. उन्हें ये भी समझाएं कि आपने किसी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन कैसे निकाला.
हर वक्त न रखें नजर
पेरेंट्स को लगता है कि कहीं बच्चा कुछ गलत न सीख जाए या चोट न लग जाए. इस वजह से कई बार ओवर प्रोटेक्टिव हो जाते हैं लेकिन अगर आप उनपर हर वक्त हर छोटी चीज को लेकर नजर रखेंगे तो न सिर्फ रिश्ते में खटास बढ़ सकती है, बल्कि वह खुद नहीं सोचना सीख पाएंगे. वह आपके ऊपर डिपेंड हो सकते हैं. आप रिजल्ट देखे के लिए उन्हें कुछ चीजों के फैसले लेने दें. बस आप गाइडेंस की भूमिका निभाएं.





