जब एक फिल्म ने सुनील दत्त को कंगाली की कगार पर ला दिया, लग्जरी कार बेची और बंगला तक रखना पड़ा गिरवी​

बड़ें कलाकारों, बड़े बजट और एक लंबा समय लेकर बनाई गई फिल्म, जिसने सुनील दत्त को बना दिया कंगाल। भारतीय सिनेमा में अभिनेता सुनील दत्त का नाम काफी सम्मान के साथ लिया जाता है। एक्टर अपने समय के उन चुनिंदा कलाकारों में से एक थें जिन्हें अपने काम के प्रति जिम्मेदार और परफेक्शन के लिए जाना जाता था। उन्होंने बतौर एक्टर और निर्माता कई फिल्मों में काम किया लेकिन उनके करियर में एक ऐसी फिल्म भी रही जिसने उन्हें लगभग दिवालिया होने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया।

जब एक फिल्म ने सुनील दत्त को कंगाली की कगार पर ला दिया, लग्जरी कार बेची और बंगला तक रखना पड़ा गिरवी​

फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ ने बदल दी सुनील दत्त की किस्मत

बॉलीवुड में बहुत सी ऐसी फिल्में है जिसने कई एक्टर्स की किस्मत बदल दी लेकिन वहीं कुछ वो फिल्में भी हैं जिन्हे बनाने के चक्कर में निर्माता सड़क पर आ गए। साल 1971 में आई आइकॉनिक फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ जिसने सुनील दत्त की किस्मत बदल कर रख दी। तो अपने करियर के शुरुआती समय में ही नरगिस से शादी कर चुके एक्टर सुनील दत्त पर पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई थी।

1963 में उन्होंने फिल्म ‘ये रास्ते है प्यार के’ से प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा था। सुनील दत्त भले ही एक दरियादिल और इमोशनल निर्माता थे लेकिन हिसाब के मामले में ज्यादा अच्छे नहीं थे। यही कमी उन्हें बाद में बहुत महंगी पड़ी।

बड़े मन से सुनील दत्त ने फिल्म ‘रेशमा और शेर’ का निर्माण किया। शुरुआत में फिल्म के डायरेक्टर कोई और थे लेकिन एक्टर को उनका काम कुछ पसंद नहीं आया। ये फिल्म एक मल्टी स्टारर फिल्म थी। इसमें वहीदा रहमान, राखी, अमिताभ बच्चन और खुद सुनील दत्त मौजूद थे। इतने बड़ें कलाकारों के साथ फिल्म का बजट काफी अच्छा रखा गया था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। फिल्म में अमिताभ ने सुनील दत्त के गूंगे भाई का किरदार निभाया था, ये किरदार उन्होंने अमिताभ को नरगिस के कहने पर दिया था।

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15 दिन का शूट 2 महीने में हुआ खत्म

इस फिल्म की शूटिंग रेगिस्तान के इलाकों में शूट की गई थी। फिल्म शूट करने में काफी सारे लोगों की मदद लगती है, एक बड़ा क्रू होता है जो एक फिल्म के लिए काम करता है। अब सुनील दत्त ने इस फिल्म को खत्म करने के लिए 15 दिनों का प्लान बनाया था। शूट के लिए सभी 100 से ज्यादा लोगों के क्रू के साथ 80 मील दूर पोचिना नाम के गांव में वहां तंबू गाड़ कर रहने लगे। लेकिन परफेक्ट शॉट लेने के लिए कब ये 15 दिन का प्लान 2 महीने का हो गया पता ही नहीं चला।

एक तरफ बजट बड़ रहा था और दूसरी तरफ सुनील दत्त पर पैसों का कर्ज। उनकी बेटी ने अपनी किताब ‘मिस्टर एंड मिसेज दत्त मेमोरीज ऑफ अवर पेरेंट्स’ में बताया है कि ‘एक सीन के लिए पापा को पूरे 100 ऊंट चाहिए थे, लेकिन सेट पर सिर्फ 99 ऊंट ही आ पाए। पापा इतने अड़ गए कि उन्होंने शूटिंग करने से साफ मना कर दिया।’

फिल्म फ्लॉप लेकिन मिले 3 नेशनल अवार्ड

सुनील दत्त की इस परफेक्शन का खामियाजा उनके पूरे परिवार को भुगतना पड़ा। इतनी मुश्किलों के बाद जब ये फिल्म रिलीज हुई तो बुरी तरह फ्लॉप हो गई। सुनील दत्त को एक बड़ा झटका लगा। कमाल की बात थी कि फ्लॉप होने के बाद भी रेशमा और शेरा फिल्म को 3 नेशनल फिल्म अवार्ड मिले, इतना ही नहीं फिल्म ऑस्कर के लिए भारत की तरफ से ऑफिशियल एंट्री भी बनी लेकिन ये कामयाबी एक्टर के कर्जे को कम करने के लिए कोई काम नहीं आई।

60 लाख का कर्ज, बिकने वाला था आलीशान बंगला

सुनील दत्त पर लगभग 60 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। उस समय में ये एक बहुत बड़ी कीमत थी। हालात ये हो गए कि उन्हें अपने ऑफिस के लोगों को नौकरी से निकालना पड़ा, अपनी कार बेचनी पड़ी, अपना आलीशान बंगला गिरवी रखना पड़ा। वह दौर सुनील दत्त के परिवार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था।

ऐसे समय में सुनील दत्त की मदद एक्टर विनोद खन्ना ने की। 1969 में अपनी फिल्म ‘मन का मीत’ में उन्हें रोल दिया। धीरे धीरे एक्टर ने वापसी की और नए प्रोजेक्टस से जुड़कर अपने उस समय को पीछे छोड़ दिया।

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