मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ग्लोबल स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बीते दिनों भारतीय एयरलाइंस को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की एक विशेष सहायता योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का मकसद एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमतों में भारी उतारचढ़ाव से एयरलाइंस को बचाना है. हालांकि यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे फ्लाइट टिकट सस्ते हो जाएंगे?

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का मुख्य उद्देश्य टिकटों के दाम घटाना नहीं, बल्कि अचानक होने वाली बड़ी बढ़ोतरी को रोकना है. यानी यदि भविष्य में ATF की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो एयरलाइंस पर उसका असर सीमित रहेगा और यात्रियों को बहुत ज्यादा महंगे टिकट नहीं खरीदने पड़ेंगे. एक्सपर्ट्स के मुताबिक किराए में स्थायी कमी तभी संभव होगी जब एयरलाइंस के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़े, सीटों की उपलब्धता बढ़े और यात्रियों की मांग संतुलित रहे. केवल इस योजना के आधार पर टिकटों के सस्ते होने की उम्मीद करना सही नहीं होगा.
कैसे काम करेगी नई ATF योजना?
सरकार की इस योजना के तहत भाग लेने वाली भारतीय एयरलाइंस को निश्चित बेंचमार्क कीमत पर जेट फ्यूल उपलब्ध कराया जाएगा. इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में आने वाले बड़े उतारचढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी. घरेलू उड़ानों के लिए ATF की बेंचमार्क कीमत 86.32 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह 104.49 रुपये प्रति लीटर होगी. इसके मुकाबले बाजार आधारित मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है. हालांकि अंतिम ATF कीमत सभी एयरपोर्ट पर एक जैसी नहीं होगी. राज्य सरकारों के टैक्स, एयरपोर्ट शुल्क और अन्य चार्ज जोड़ने के बाद दिल्ली में इसकी कीमत करीब 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.50 रुपये और चेन्नई में लगभग 139 रुपये प्रति लीटर पड़ सकती है.
एयरलाइंस को क्या फायदा होगा?
ATF किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का करीब 40 फीसदी हिस्सा होता है. जब ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो यह हिस्सा 5560 फीसदी तक पहुंच सकता है. हाल के महीनों में पश्चिम एशिया संकट और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने जैसी परिस्थितियों ने भारतीय एयरलाइंस की लागत बढ़ा दी है. इसके चलते कई एयरलाइंस ने कुछ अंतरराष्ट्रीय और कम मुनाफे वाले रूट्स पर उड़ानों की संख्या घटाई है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। नई योजना से एयरलाइंस को लागत का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी और उनके नकदी प्रवाह पर दबाव कम होगा. इससे भविष्य में कुछ रूट्स पर सेवाएं बहाल करने की संभावना भी बढ़ सकती है.
आम यात्रियों पर क्या होगा असर?
यात्रियों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हवाई किरायों में अचानक होने वाली तेज बढ़ोतरी कम हो सकती है. खासकर त्योहारों, छुट्टियों या किसी वैश्विक संकट के दौरान जब ईंधन महंगा होता है, तब टिकटों के दाम तेजी से बढ़ जाते हैं. हालांकि सरकार ने एयरलाइंस को यह निर्देश नहीं दिया है कि ईंधन लागत में मिलने वाली राहत का लाभ सीधे यात्रियों तक पहुंचाया जाए. ऐसे में एयरलाइंस अपनी व्यावसायिक रणनीति के अनुसार किराया तय करती रहेंगी.
तेल कंपनियों को भी मिलेगी राहत
यह योजना केवल एयरलाइंस के लिए नहीं बल्कि सरकारी तेल कंपनियों के लिए भी मददगार होगी. सरकार उन्हें ब्याज मुक्त अग्रिम राशि उपलब्ध कराएगी, जिससे ATF बिक्री पर होने वाले अस्थायी नुकसान का बोझ कम होगा. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें सामान्य होंगी तो इस व्यवस्था के तहत दी गई सहायता राशि की वसूली की जाएगी. यानी यह स्थायी सब्सिडी नहीं बल्कि एक अस्थायी स्थिरीकरण तंत्र है.
सरकार की ATF स्थिरीकरण योजना भारतीय एविएशन सेक्टर को मौजूदा ग्लोबल संकट के दौर में राहत देने का प्रयास है. इससे एयरलाइंस की लागत पर दबाव कम होगा और हवाई किरायों में अचानक आने वाली तेज उछाल को नियंत्रित किया जा सकेगा. हालांकि आम यात्रियों को सस्ते टिकटों का सीधा लाभ मिलेगा, इसकी फिलहाल कोई गारंटी नहीं है. टिकटों की कीमतें आगे भी मांग, प्रतिस्पर्धा और एयरलाइंस की रणनीति पर काफी हद तक निर्भर रहेंगी.





