अमेरिकी हमलों से बचने के लिए पाकिस्तानी एयरबेस पर उतरे थे ईरानी जेट, बड़ा खुलासा​

इस्लामाबाद: अमेरिका के खिलाफ लड़ाई के दौरान पाकिस्तान ने कथित तौर पर ईरान की मदद की थी। सीबीएस न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी सेना के विमानों को अपने एयरबेस पर उतरने की इजाजत दी थी, ताकि वह अमेरिकी हमलों से सुरक्षित रह सकें। इस कथित खुलासे से पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के मीडियर के रोल पर सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ है और खुद को निष्पक्ष दिखाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिकी हमलों से बचने के लिए पाकिस्तानी एयरबेस पर उतरे थे ईरानी जेट, बड़ा खुलासा​

सीबीएस न्यूज ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरानी सैन्य विमानों को नूर खान एयरबेस पर पार्क किया गया था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। पाकिस्तानी की सेना और सरकार ने इसके लिए ईरान को इजाजत दी थी। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिकी सीनेटर और ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका अब संदेह के घेरे में है और इस मामले की जांच की जाएगी।

पाकिस्तान भेजे गए ईरानी विमान
मामले से परिचित अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान ने कई विमानों और सैन्य संपत्तियां को रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तानी एयर फोर्स के नूर खान बेस भेज दिया था। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अस्थायी युद्ध विराम की घोषणा के बाद ये किया गया था।

ईरान ने अपने कई अहम लड़ाकू विमानों को नूर खान बेस में पार्क किया था। बताया जाता है कि वहां तैनात विमानों में ईरानी वायु सेना का एक RC130 टोही विमान भी शामिल था। यह विमान लॉकहीड C130 हरक्यूलिस परिवहन विमान का ही एक निगरानीविशेष संस्करण है। इसके अलावा भी कुछ संपत्तियां भेजी गई थीं।

पाकिस्तानी अफसर ने किया खारिज
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान में विमानों की आवाजाही का मकसद ईरान के बाकी बचे विमानन और सैन्य साजोसामान को संभावित अमेरिकी हमलों से बचाना था क्योंकि इलाके में तनाव बढ़ रहा था। रिपोर्ट में ईरान के अपने नागरिक विमानों के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भेजने का भी दावा किया गया है।

एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने नूर खान एयर बेस से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए सीबीएस न्यूज को बताया कि ऐसी कोई भी गतिविधि छिपी नहीं रह सकती क्योंकि यह बेस घनी आबादी वाले शहरी इलाके में स्थित है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं है और इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं है।

अफगानिस्तान ने क्या कहा है
अफगानिस्तान के नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले ‘महान एयर’ का विमान काबुल में उतरा था। लड़ाई के चलते ईरानी हवाई क्षेत्र बंद हो गया। ऐसे में यह विमान कुछ दिन काबुल में रहा। बाद में विमान को ईरानी सीमा के पास स्थित हेरात हवाई अड्डे पर भेज दिया गया क्योंकि काबुल के पास पाकिस्तान ने हवाई हमले शुरू कर दिए थे।

अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान को अपने विमानों को वहां भेजने की कोई जरूरत नहीं थी। ईरान के विमान का कुछ दिन काबुल में रहना एक इत्तेफाक से ज्यादा कुछ नहीं था।

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